आगरालीक्स…आगरा में जन्माष्टमी पर घर-घर में सजाए जाते थे हिंडोले। पहले जैसा नहीं रहा क्रेज। नमक की मंडी के हिंडोले देखने के लिए लाइन में लगकर करना पड़ता था घंटों इंतजार। आपको भी याद होंगे
एक सप्ताह पहले हो जाती थी तैयारी
श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर आगरा पर करीब एक सप्ताह पहले से ही घर-घर में हिंडोले सजाने की तैयारी हो जाती थी। लोग घरों में लकड़ी के बुरादों को विभिन्न रंगों में रंगकर उससे सड़क, गलियां बनाते थे। गत्तों से विभिन्न प्रकार के मॉडल बनाया करते थे, उस समय अंजना टॉकीज का मॉडल, बल्केश्वर कॉलोनी मॉडल देखते ही बनता था।
ऐसे खिलौने होते थे आकर्षण का केंद्र
विभिन्न प्रकार के खिलौने हिंडोलों की शोभा बढ़ाते थे। खासकर एक सारसनुमा कांच का बैलेंस किया खिलौना जो जरा सा धक्का देने पर झुककर पानी पीता था। लकड़ी और टीन से बने मुर्गों की लड़ाई के खिलौने आम सजाए जाते थे, जिसके घर में कोई बैटरी या बिजली से स्वचालित खिलौना होता था, उसके हिंडोले देखने को भीड़ लगती थी। परिजन अपने बच्चों को लेकर गली-गली और घर-घर जाकर हिंडोले देखते थे और अपने बच्चों को दिखाते थे।

नमक की मंडी के हिंडोले देखने को लगती थी लाइनें
सेंटजोंस कॉलेज के प्रोफेसर डा. पीसी माहेश्वरी के नमक की मंडी स्थित मकान पर सजाए जाने वाले हिंडोले आगरा में प्रसिद्ध थे। इन हिंडोलों को देखने के लिए शहर से ही नहीं गांव कस्बों और दूरदराज से लोग देखने आते थे। हींग की मंडी की तंग गलियों मे लाइन लगाकर हिंडोले देखने का घंटों इंतजार करते थे। यह हिंडोले तीन दिन तक सजे रहते थे।