आगरालीक्स…आगरा के लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर…अकबर भी था जहां नतमस्तक, जानिए कैसे इस मंदिर का नाम लंगड़े की चौकी पड़…श्री हनुमान जन्मोत्सव पर विशेष…
आगरा को वैसे शिवनगरी के रूप में जाना जाता है. यहां के चारों कोनों पर शिवजी पृथ्वीनाथ, कैलाश, बल्केश्वरनाथ और राजेश्वरनाथ के रूप में विराजमान हैं तो वहीं शहर के मध्य में रावली महादेव और श्री मनकामेश्वरनाथ महादेव विराजित हैं. लेकिन आगरा का लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है. यह मंदिर आगरा बाईपास पर स्थित है जो कि अपनी धार्मिक महत्वता के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास स्थान रखता है. कहा जाता है कि यह मंदिर राजा भोज के समय का है लेकिन अकबर भी इस मंदिर की महिमा के आगे नतमस्तक था.
जानिए कैसे पड़ा लंगड़े की चौकी हनुमान मंदिर नाम
इस मंदिर का नाम लंगड़े की चौकी कैसे पड़ा, इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है. मंदिर के महंतों की मानें तो यह घटना अकबर के शासनकाल की है. उस समय मंदिर के पास एक सुरक्षा चौकी हुआ करती थी जिस पर एक सिपाही पहरा देता था. मंदिर में रामकथा का आयोजन होता था और यह चौकीदार रोजकथा सुनने के लिए मंदिर आता था. एक दिन मुगल सिपाहियों ने कोतवाल से शिकायत की कि वह चौकीदार पहरा छोड़कर मंदिर जाता है, इस पर गुस्से में आकर कोतवाल ने चौकीदार की टांग कटवा दी ताकि वह मंदिर न जा सके.
चमत्कार को जान अकबर भी हुआ नतमस्तक
लेकिन अगले ही दिन कोतवाल को पता चला कि वही चौकीदार फिर से मंदिर में बैठा हुआ है. इस पर कोतवाल ने गुससे में रामकथा स्थल पर जाकर देखा तो वह चौकीदार लंगड़ा होकर बैठा था. इस दृश्य को देखकर कोतवाल चौकी पर गया और देखा कि वहां भी वह चौकीदार बैठा हुआ है. यह चमत्कार देख कोतवाल ने इसकी जानकारी अकबर तक पहुंचाई. तब अकबर ने भी इसकी महिमा को जाना और नतमस्तक हुआ. कहा जाता है कि इस घटना के बाद इस मंदिर का नाम लंगड़े की चौकी पड़ा, क्योंकि हनुमान जी खुद उस लंगड़े चौकीदार की जगह पहरा दे रहे थे.
भक्त के लिए खुल गए मंदिर के दरवाजे
महंतों के अनुसार करीब चार दशक पहले की एक घटना है. एक श्रद्धालु मुंबई से मंदिर दर्शन के लिए आया, लेकिन उसकी ट्रेन लेट हो गई और मंदिर के पट बंद हो चुके थे. श्रद्धालु ने दरवाजा खटखटाया और महंत जी से हनुमान जी के दर्शन कराने की विनती की. महंत जी ने मंदिर का दरवाजा नहीं खोला और कहा कि आप बाहर से ही अपनी श्रद्धा पूरी कर लें. ऐसे में श्रद्धालु निरोश हो गया, क्योंकि मंदिर में अंधेरा था और बिजली भी नहीं थी. महंत जी के हाथ में सिर्फ एक लालटेन थी. लकिन तभी अचानक मंदिर के दरवाजे एक आवाज के साथ अपने आप ही खुल गए और एक उजाला हुआ. श्रद्धालु ने मंदिर के अंदर जाकर हनुमान जी के दर्शन किए. जब श्रद्धालु दार्श्न के बाद चला गया तो मंदिर के पट फिर से बंद हो गए.