आगरालीक्स…फीस नहीं तो बुक्स में मिलने वाला कमीशन तो हो सकता है माफ. सिटी के कई स्कूलों ने लॉकडाउन के कारण तीन महीने तक की फीस माफ कर दी है, लेकिन अधिकतर सीबीएसई स्कूल ऐसे हैं जो कि फीस माफ नहीं करने में खुद को असमर्थ मान रहे हैं. लेकिन वो बुक्स में कमीशन न लेकर लोगों को राहत तो दे सकते ही हैं. निजी स्कूलों में पब्लिशर्स राइटर्स की संख्या बहुत अधिक है. क्लास एक और बुक्स सभी में अलग. इसकी वजह है इनसे स्कूलों को मिलने वाला मोटा कमीशन.
15 मार्च से बंद हैं स्कूल
कोरोना महामारी के कारण शहर के सभी स्कूल 15 मार्च से बंद हो गए. बच्चों के एग्जाम तक नहीं हो सके. सरकार के आदेश पर बच्चों को दूसरी क्लास में प्रमोट कर दिया गया. अप्रैल से न्यू सेशन स्टार्ट हो रहा था लेकिन लॉकडाउन के कारण सब बंद हो गया. ऐसे में स्कूलों ने आॅनलाइन एजुकेशन है स्टार्ट कर दिया गया.
फीस माफी की मांग
पेरेंटस की मानें तो तीन महीने से काम बंद है. व्यापार पूरी तरह से चौपट है. सब लोग घर पर ही कैद हैं. ऐसे में वह कैसे तीन महीने की फीस स्कूलों को दे सकते हैं. इसके अलावा एडमिशन फीस की भी डिमांड की जा रही है. पेरेंटस के अनुसार तीन महीने और एडमिशन फीस को मिलाएं तो यह 25 से 40 हजार रुपये तक का मामला है. वह इतनी बडी रकम को कैसे एकसाथ दे सकते हैं.
बुक्स में मोटा कमीशन
शहर के कई स्कूलों ने पेरेंटस की इस परेशानी को ध्यान में रखकर तीन महीने की फीस माफ कर दी है लेकिन कई स्कूल ऐसे हैं जो कि फीस माफ न कर पाने की बात कह रहे हैं. पेरेंटस का कहना है कि अगर स्कूल फीस माफ नहीं कर सकते तो कम से कम बुक्स में मिलने वाला मोटा कमीशन तो माफ कर ही सकते हैं. जानकारी के अनुसार सीबीएसई के हर स्कूल में अपने पब्लिशर्स हैं. और इसकी एवज में वो बुक्स में मोटा कमीशन वसूलते हैं.
250 से 300 रुपये तक की एक किताब
स्कूलों में पढाई जाने वाली किताबें काफी महंगी हैं. 70 से 80 पेज तक की बुक्स की कीमत 250 से 300 रुपये तक होती है. इसके अलावा कई किताबों की कीमत तो 800 से 1000 रुपये तक होती है.