आगरालीक्स…मांगलिक होने पर घबराएं नहीं, न इसे हौव्वा बनाएं. जानिए मांगलिक होना दोष होता है या योग. ज्योतिषाचार्य अंशु पारीक से जानिए इसके प्रथम भाग में
अक्सर लोग मांगलिक योग को मांगलिक दोष कहते हैं, जबकि मंगल का किसी विशेष भाव में होना दोष नहीं बल्कि योग होता है। जिसका अच्छा या बुरा दोनों प्रकार का प्रभाव हो सकता है। मुख्य रूप से वैवाहिक जीवन पर अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ सकता है। जरूरी नहीं कि मांगलिक होने पर जीवन में कष्ट ही हो। यह योग शुभफलदायी भी हो सकता है। इसलिए मांगलिक होने पर घबराएं नहीं। न ही इसे हौव्वा बनाएं। यह योग आपके वैवाहित जीवन में खुशियों व सुख सम्वृद्धि का कारण भी हो सकता है।क्या है मांगलिक योग
जब मंगल ग्रह व्यक्ति की कुंडली में पहले, चौथे, सातवें, आठवें व बाहरवें भाव में हो तो मांगलिक योग कहताला है। मंगल ग्रह की तीन दृष्टियां होती हैं। चौथी, सातवीं और आठवीं दृष्टि। प्रथम भाव में मंगल होने पर उसकी सातवी दृष्टि सप्तम भाव यानि (आपके जीवनसाथी के भाव) पर पड़ती है। चौथे भाव में मंगल होने पर उसकी चौथी दृष्टि सप्तम भाव पर होती है सातवें भाव में मंगल खुद बैठे होने पर वैवाहित जीवन को प्रभावित करने के साथ अपनी अष्टम दृष्टि से कुटुम्ब बाव को बी देखता है। वहीं आठवें भाव में बैठे मंगल की सातवीं दृष्टि कुटुम्ब भाव पर और बाहरवें भाव में बैठे मंगल की आठवी दृष्टि सप्तम भाव पर होती है। इस तरह इन पांच भावों में बैठा मंगल आपके वैवाहिक जीवन व कुटुम्ब भाव को किसी न किसी तरह प्रभावित कर रहा होता।
जीवन में मुख्य रूप से चार प्रकार के सुख होते हैं। पहला पूर्ण आयु, दूसरा अच्छा स्वास्थ्य, तीसरा धन-सुख व पति पत्नी का सुख और चौथा संतान सुख। ज्योतिष शास्त्र में माना गया है कि यदि मांगलिक योग वाले लड़के या लड़की का विवाह ऐसे लड़के या लड़की से करा दिया जिसकी कुंडली में मंगलिक योग नहीं तो वह दम्पत्ति इन चारों प्रकार के सुख में किसी न किसी सुख से अवश्य वंचित रहते हैं।
अगले पांच अंकों में हम आपको अलग-अलग पांचों मांगलिक योग के बारे में बताएंगे