
थाना फरह के गांव झंडीपुर निवासी बबलू सिंह (38) पुत्र मलूक सिंह सेना की जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। उनका परिवार अब बालाजीपुरम, मथुरा में है। इन दिनाें वह जम्मू-कश्मीर के नौगाम सैक्टर में तैनात थे। शुक्रवार रात्रि को बबलू सिंह अपनी टुकड़ी के साथ नौगाम सेक्टर में निगरानी ड्यूटी पर थे। तभी आतंकियों ने जवानों पर हमला कर दिया। जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया। इसमें झंडीपुर के बबलू ने भी आतंकियों से जमकर लोहा लिया। भारतीय जवानों की टुकड़ी ने दो आतंकियों को मार गिराया।
दो जवान भी शहीद हो गए। इनमें एक बबलू भी शामिल थे। एडीएम प्रशासन अजय कुमार अवस्थी और सेना की स्ट्राइक वन कोर के एडम कमांडर संदीप शर्मा ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर आज रविवार को तीन बजे आर्मी हेलीपेड मथुरा पर आएगा। वहां से सेना की गाड़ी से बबलू सिंह का पार्थिव शरीर उनके मूल गांव झंडीपुर ले जाया जाएगा। वहां शाम पांच बजे अंतिम संस्कार कर सलामी दी जाएगी।
पत्नी और पांच साल का बेटा, तीन साल की बेटी
बबलू के परिवार में पिता मलूक सिंह के अलावा पत्नी रविता देवी, पुत्र दरुणा चौधरी (5) और पुत्री गरिमा (3) हैं। उनकी मां का निधन हो चुका है। वर्तमान में परिवार मथुरा के बालाजीपुरम में रह रहा है। अंतिम बार बबलू बीती 23 जून को छुट्टी पर घर आए थे। वे करीब एक हफ्ते तक परिवार के साथ रहे। लोगों को जानकारी मिली उनके घर पर भीड़ लग गई। वे छुट्टी आते थे गांव के लड़कों से सेना में जाने को कहते थे। बबलू का कहना होता था कि देश की सेवा करने का सबसे अच्छा मौका सेना में ही मिलता है। सेना की वर्दी पहनकर ही सीना चौड़ा हो जाता है। गांव के लोगों ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही बबलू गांव में आए थे और काफी समय सभी के साथ बिताया।
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