
सेंट्रल एक्साइज कमिश्नर आरसी सांखला ने निर्यातकों को भरोसा दिलाया कि कस्टम से जुड़ी सुविधाएं उनका विभाग दे रहा है, इसमें दिक्कत नहीं आने देंगे। ड्रा बैक की समीक्षा नहीं की जाती। निर्यातक टाइम, क्वालिटी और इनोवेशन फैक्टर पर जोर दें। ईज आफ डूइंग बिजनेस के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू है।
चैंबर अध्यक्ष अशोक गोयल ने कहा कि निर्यातक निर्यात कारोबार के गैप को भरने का काम कर रहे हैं, लेकिन चुनौतियों से निपटने में सरकार भी मदद दे। चेंबर उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारतीय मुद्रा की कीमत गिर रही है। निर्यातक इससे नुकसान में है। मंदी के कारण आर्डर में कमी है। कम ब्याज दर पर ऋण मिले और निर्यात में सुविधाएं बढ़ाई जाएं। एफमेक अध्यक्ष पूरन डावर ने निर्यात व्यापार में संभावनाएं सीमित बताईं। उन्होंने कहा कि नए तरीके से नए उत्पादों के बारे में सोचना होगा। प्रतिस्पर्धा ज्यादा होने से निर्यात बढ़ाने में प्रोत्साहन चाहिए।
एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक (एक्जिम) की कार्यकारी निदेशक दया चंद्रहास ने विदेश में आफिस खोलने में बैंक की वित्तीय मदद, निर्यातकों को विदेशी क्रेेता खोजने में मदद देने के बारे में बताया। ईसीजीसी मैनेजर संजय कुमार ने निर्यात में जोखिम कम करने के बारे में बताया। वर्कशॉप में राजेश अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, अवनीश कौशल, एसपी फरसैया, एसएस गोयल आदि मौजूद रहे।
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