
आगरा के अछनेरा के गांव थापी में मंगलवार को नीम के पेड से दूध जैसा सफेद पदार्थ निकलने लगा, कुछ लोगों ने इसका स्वाद चखा तो वह मीठा था। इसके बाद तो नीम के पेड के पास भीड लग गई, पूजा अर्चना होने लगी। दूध को देवीय चमत्कार मानते हुए प्रसाद के रूप में लोग उसे ले रहे हैं। लोगों का मानना है कि दूध के प्रसाद से चर्म रोग और गंभीर रोग दूर हो जाएंगे। सुबह से रात तक पेड के पास लोगों की भीड लगी रही।
चंदा कराकर जागरण न कराने से निकल रहे मां के आंसू
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में देवी जागरण के लिए चंदा किया था। गांव में पंचायत हुई, इसमें देवी जागरण न कराने का निर्णय लिया गया। सोमवार शाम से ही नीम के पेड से दूध की धार निकलने लगी, ग्रामीणों का कहना है कि चंदा कराने के बाद भी देवी जागरण न कराने से देवी मां नाराज हो गई हैं और उनकी आंखों में से दूध के रूप में आंसू निकल रहे हैं। इससे ग्रामीण भी परेशान हैं। देवी मां के नाराज होने पर उन्हें मनाने के लिए दशहरा पर देवी जागरण का फैसला लिया गया है। इसके बाद नीम के पेड की दूध की धार कमजोर होती चली गई।
देवी चमत्कार नहीं, यह है सामान्य प्रक्रिया
डॉ भीम राव अंबेडकर विवि, आगरा के वनस्पति विज्ञान विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि पीपल, गूलर, नीम सहित अन्य बडे पेड जमीन से पानी और मिनरल अवशोषित करते हैं, यह पेड के पत्तों तक पहुंचता है। फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया के दौरान पानी उड जाता है, पेड को आॅक्सीजन और मिनरल मिलते हैं, शेष पदार्थ धीरे धीरे पेड से निकलता रहता है। कई बार तापमान में गिरावट आने और पेड के आस पास के क्षेत्र में झाग के रूप में पानी होने पर वह पेड तक पहुंच जाता है, प्रेशर अधिक होने पर यह तने से निकलने लगता है। यह पेड की सामान्य प्रक्रिया होती है।
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