आगरालीक्स… आगरा कॉलेज, आरबीएस कॉलेज सहित प्रदेश के कॉलेजों को स्थायी प्राचार्य मिल जाते, प्राचार्य भर्ती परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका है। मगर, कुर्सी पर बैठे कार्यवाहक प्राचार्य नहीं चाहते कि स्थायी प्राचार्य नियुक्त हों। नतीजतन, प्राचार्य भर्ती परीक्षा में असफल रहे कार्यवाहक प्राचार्य कोर्ट में चले गए हैं और याचिका दायर कर दी है।
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग द्वारा प्राचार्य भर्ती परीक्षा आयोजित की, इंटरव्यू के बाद प्राचार्य पद पर चयनित हुए अभ्यर्थियों का परिणाम जारी कर दिया गया है। इन्हें कॉलेज आवंटन किया जाना हैं, ऐसे में प्लेसमेंट प्रक्रिया को रोकने के लिए कार्यवाहक प्राचार्य का एक ऐसा समूह जो इस पद की परीक्षा में तो फेल हो गया परन्तु कालेजों में घपले -घोटाले में लगा हुआ है, अब इसे रोकने में पूरी सक्रियता दिखा रहा है। इस विज्ञापन के खिलाफ रिट करने वाले लोगों की कुंडली खंगालने का काम अब धीरे-धीरे शुरू हो गया है। हर कॉलेजों से इस विज्ञापन के खिलाफ रिट करने वाले लोगों के विरोधी खेमा से तमाम पत्र और उनके घपले घोटाले की सूचना धीरे-धीरे प्राप्त हो रही हैं।कई रिट करने वाले कार्यवाहक प्राचार्य ने कॉलेजों में मोटा माल कमाया है। किसी भी दशा में यह लोग अपने पद को नहीं छोड़ना चाहते हैं। एक रिट करने वाले तो प्रॉपर्टी डीलिंग और प्लॉटिंग का बड़ा व्यवसाय करते हैं।प्राचार्य पद पर चयनित होने की बहुत सारी जुगत लगाने के बाद जब भी जब फेल हो गए तो रिट कर दी।
विज्ञापन संख्या 49 के खिलाफ एक अन्य रिट करने कार्यवाहक प्राचार्य की विश्वविद्यालय परीक्षा का पेपर आउट करने के मामले में जांच चल रही है । इस प्रकरण की जांच गहनता से एसआईटी कर रही है। कार्यवाहक प्राचार्य घबराए हैं कि उनकी कुर्सी पर कोई और बैठ गया तो कहीं लेने के देने ना पड़ जाए, इसीलिए आनन-फानन में उच्च न्यायालय की शरण में पहुंच गए है ।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य शिक्षा के क्षेत्र में आनन फानन में पीएचडी कराने में वह दिग्विजयी है। शोध छात्रों पीएचडी कराने में सिद्धहस्त हैं। इनकी कुंडली भी ठीक प्रकार से खंगाली जा रही है।
पश्चिम के एक प्रसिद्ध गुरुजी रिट करने में माहिर हैं और अब तक कई रिट इस विज्ञापन के खिलाफ कर चुके हैं , उनके पास 28 पीएचडी अवार्ड कराने का विश्व रिकॉर्ड है। रिट करने वालों में एक मोहतरमा भी हैं। परीक्षा परिणाम में मोहतरमा का नाम नहीं होने से वह आयोग के ऊपर भयंकर रूप से कुपित हो गई है।
रिट करने वाली एक और कार्यवाहक प्राचार्य के पति-पत्नी की जोड़ी सुपरहिट और पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय हैं। पतिदेव लंबे समय से कार्यवाहक प्राचार्य हैं, जिस पार्टी की सरकार होती है तुरंत एडजस्ट हो जाते है। अच्छी मेरिट पर सेलेक्ट होने पर भी पत्नी ही राहु बन कर उनको कार्यवाहक से आगे नहीं बढ़ने देना चाहती है। पतिदेव राजनीतिक रसूख, अपने जुगाड़ तकनीक के लिए विख्यात है। पत्नी भी जल्दी ही अभी कार्यवाहक प्राचार्य बनी है, उनको दिन -रात भय सताता रहता है कि कहीं कोई मेरा पद ले तो नहीं लेगा ।
जौनपुर के एक कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य की रिट के तर्क तो ऐसे इमोशनल और निराले हैं कि उसका जबाब अब किसी को सूझ ही नही रहा। उनका कहना है कि मेरे अलावा कोई इस पद को धारण कर ही नहीं सकता है। प्राचार्य पद से संबंधित सभी गुण केवल मेरे अंदर निवास करते हैं । प्राचार्य पद को धारण करने की व्यवहारिक योग्यता भी केवल मेरे पास है। न्यूनतम API मैं इसलिए नहीं बना पाया क्योंकि मैं कार्यवाहक प्राचार्य था, मैंने कार्यवाहक के पद पर पूरी तत्परता से काम किया है, इसलिए टाइम ही नहीं मिल पाया की API जुटा पाता। इस पद से जब तक रिटायर ना हो जाऊं, तब तक इसे धारण करने लायक केवल इस धरा पर श्रेष्ठ व्यक्ति मैं ही हूँ। उनका कहना है कि विगत के 17 वर्षों से मुझे कार्यवाहक प्राचार्य की कुर्सी पर बैठने की आदत हो गई है, अब मैं शिक्षक के रूप में कार्य करने में अपने को असमर्थ पा रहा हूं। इसलिए मेरे कॉलेज में किसी को भी प्राचार्य पद पर नहीं भेजा जाए अन्यथा अनहोनी हो जाएगी।
(प्राचार्य पद पर चयनित हुए शिक्षक तैयार कर रहे कार्यवाहक प्राचार्यों की कुंडली, जुटाए जा रहे सुबूत)