
आगरा में 13 मार्च की शाम को मदिया कटरा में हिंदुस्तान पेपर्स फर्म के मालिक से प्रतीक वाष्र्णेय के बेटे का कोठी के अंदर से अपहरण कर लिया था। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद एसटीएपफ सहित क्राइम ब्रांच सक्रिय हो गई थी। परिजनों को आशंका थी कि बदमाश िफरौती मांगेंगे, इसलिए उन्होंने संपर्क करना बंद कर दिया था। आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को 11 बजे एकलव्य स्पोटर्स स्टेडियम आना है। इससे पहले सुबह दिव्य को मुक्त करा लिया गया।
झांसी में कमरे में रखा
दिव्य को कोठी से बाइक से किडनैप करने के बाद बोदला पर बोलेरों में बिठा दिया। यहां से उसे झांसी ले गए। वहां एक कमरे में दिव्य को रखा गया, वह रोए नहीं इसके लिए उसे उसकी पसंद का खाना खिलाया गया, उसने लूडो खरीदने के लिए तो बदमाश लूडो खरीद कर लेकर आए।
पुलिस मुठभेड के बाद हुआ मुक्त, मुवीन गैंग ने किया किडनैप
ताजगंज दिगनेर नहर पर सीओ असीम चौधरी के नेत्रत्व में पुलिस की बदमाशों से मुठभेड हुई। पुलिस ने मुवीन, बब्बू पहलवान निवासी शमसाबाद, समीर निवासी पफीरोजाबाद और अज्जू निवासी आलमगंज को पकड लिया, उनके दो साथी पफरार हो गए। मुठभेड के बाद पुलिस ने दिव्य को मुक्त करा लिया।
कोठी से हुई रैकी
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि प्रतीक ने अपने घर पर गोदाम किराए पर दिया था। वहां से ही दिव्य की रैकी की गई। पुलिस छानबीन में जुटी हुई है।
सांई बाबा के मंदिर पहुंचा, दादी से लिपटा
अपहरण मुक्त होने के बाद दिव्य के पिता प्रतीक और मां निशा उसे लेकर राजा की मंडी स्थित सांई मंदिर पर पहुंचे। यहां से वे घर गए। प्रतीक की दादी शशि और दादा लव कुमार ने उसे गले लगा लिया। वे भावुक हो उठे।
सोशल मीडिया पर बधाई
इस खबर के बाद से सोशल मीडिया पर दिव्य के घर आने पर बधाई का सिलसिला शुरू हो गया। एक दूसरे से लोग दिव्य के अपहरण मुक्त होने की जानकारी लेते रहे।
घर के अंदर से किया किडनैप
मदिया कटरा में लिबर्टी कोठी निवासी लव कुमार वाष्र्णेय का सेठ गली में हिंदुस्तान पेपर्स के नाम से बडा कारोबार है। उनके परिवार में उनकी पत्नी शशि वाष्र्णेय, इकलौटा बेटा प्रतीक वाष्र्णेय, उनकी पत्नी निशा और दो बेटों में बडा बेटा दिव्य और छोटा बेटा कविश है। छह साल का दिव्य डीपीएस में कक्षा दो का छात्र है। उनकी कोठी करीब ढाई हजार वर्ग गज में है, शाम को दिव्य कोठी के अंदर ही साइकिल चलता था। रविवार शाम 6 45 बजे दिव्य कोठी में साइकिल चला रहा था। उसकी दादी शशि पोर्च में बैठी थी।
दिव्य साइकिल से चक्कर लगाने के बाद अपनी दादी के हाथ से रोटी खाता और चक्कर लगाने लगता। वह मेन गेट से दादी की तरफ लौट रहा था, दादी के हाथ में खाना था, इसी बीच गेट खुला और एक युवक ने दिव्य को
गोद में उठा लिया, उसकी चीख सुनकर शशि कुर्सी से खडी हुई, उन्होंने देखा कि एक युवक दिव्य को ले जा रहा था। उनके शोर मचाने पर दिव्य की मां निशा ने गेट की तरफ दौड लगा दी,
निशा बाहर आई तब तक बदमाशों ने दिव्य को बाइक पर बीच में बिठा लिया था और कैलाशपुरी
की तरफ ले गए।
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