आगरालीक्स…बच्चों को स्कूल जाना है…18 साल तक के बच्चों के लिए अभी नहीं है वैक्सीन..ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञों से जानें—पेरेंट्स को क्या रखना होगा ध्यान. शिक्षकों के लिए भी बताईं जरूरी बातें…

इस तारीख से खुलेंगे स्कूल
गौरतलब है कि शुक्रवार को शासन से आदेश के अनुसार कक्षा 6 से 8 तक के बच्चे 10 फरवरी से स्कूल जाएंगे तो वहीं कक्षा 1 से लेकर 5 तक के बच्चे 1 मार्च से स्कूल जाने को कहा गया है. कक्षा एक से 8 तक के बच्चे छोटे—छोटे होते हैं, ऐसे में कोरोना महामारी के इस दौर में स्कूल जाते समय बच्चों के अभिभावकों को क्या ध्यान रखना होगा और क्या—क्या सावधानी बरतनी होगी. इसकी जानकारी आगरा के बाल रोग विशेषज्ञों ने दी है. डॉक्टरों ने बच्चों के अभिभाावकों की ही नहीं बल्कि शिक्षकों को भी जरूरी बातें ध्यान में रखने को कहा है. आगरालीक्स के माध्यम से जानिए क्या कहते हैं बाल रोग विशेषज्ञ.
डॉ. नीरज
बाल रोग विशेषज्ञ, एसएन मेडिकल कॉलेज
सरकार का जो आदेश आया है उसका ध्यान रखना होगा. अच्छी बात है कि इस समय कोरोना कंट्रोल हो रहा है लेकिन ये बच्चों से जुड़ा मामला है, ऐसे में बच्चों का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी होगा. बच्चों के लिए सेनेटाइजर, मास्क और सोशल डिस्टेंस मेंटेन हो इसका विशेष ध्यान रखना होगा. पेरेंट्स को बच्चों के लिए खाने पीने और स्कूल छोड़ने तक सावधानी बरतनी होनी होगी. अगर पेरेंट्स खुद ही अपने वाहनों से बच्चों को स्कूल छोड़ने जाएं तो ज्यादा बेहतर होगा, क्योंकि स्कूल वैनों में जरूरी सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन होना थोड़ा मुश्किल है. इसके अलावा पेरेंट्स बच्चों को जो खाना टिफिन में दे रहे हैं उसे फिलहाल किसी से भी शेयर करने को न करें. यही नहीं स्कूल में शिक्षकों को भी ये ध्यान रखना होगा कि बच्चा जिस सीट पर बैठे, अगले दिन भी बच्चा उसी सीट पर बैठे और समय—समय पर सेनेटाइज भी करते रहें. बच्चे ट्रिपल लेयर मास्क पहन सकते हैं, जिससे उन्हें सांस आदि लेने में कोई दिक्कत न हो.
डॉ. अरुण जैन
चाइल्ड स्पेशलिस्ट, आगरा
सबसे ज्यादा जरूरी है कि बच्चों को प्रॉपर हैंड वाशिंग मेंटेन करनी होगी. दूसरा अगर बच्चे में अगर कोई सिम्पटम्स लगता है—जैसे बुखार है या खांसी है, जुकाम है तो उसे स्कूल न भेजें और डॉक्टर से सलाह लें. तीसरा बच्चा स्कूल में कोई जंक फूड न खाएं, होम फूड ही खाएं और बाजार का न खाएं. आनलाइन क्लासेस कम हो जाए तो ज्यादा बेहतर है क्योंकि सक्रीन टाइमिंग बच्चों का तीन गुना तक बढ़ गया है जिसका कम होना ज्यादा जरूरी है. बच्चों को आउटडोर खुली हवा में एक्सरसाइज कराएं. स्कूल में भी ध्यान रखना होगा. शिक्षक ध्यान रखें कि प्रेयर के समय बच्चा एकत्रित न हों. ग्रुप एक्टिविटी बिल्कुल न हों. आधे बच्चे एक दिन और आधे बच्चे अगले दिन बुलाएं तो ये मेंटेन किया जा सकता है. दो साल से कम उम्र के बच्चों को मास्क नहीं पहनाना चाहिए. अगर बच्चे स्कूल जाते हैं तो वह पूरा टाइम मास्क नहीं पहन सकते है. ऐसे में उन्हें थोड़ा थोड़ा ब्रेक देकर बाहर फ्रेश करना चाहिए.
डॉ. जेएन टंडन
चाइल्ड स्पेशलिस्ट, आगरा
मूल जो बचाव के उपाय हैं इनसे चिपके रहना होगा. सजगता ज्यादा जरूरी है. ये जरूरी है कि मास्क और सेनेटाइजेशन और पेरेंट्स को ये भी बता कर चलना होगा कि दूरी बनाकर रखें. स्कूल संचालक भी बच्चों पर ध्यान दें. हाथ प्रॉपर धुलवाएं. खाना खाने के बाद जरूर हाथ धुलवाएं. बिना मास्क वालों की एंट्री न हो. ये भी किया जा सकता है कि वैकल्पिक दिन रखें जाएं कि आधे बच्चे आज आएं और आधे बच्चे कल. जिससे उनके बीच सामाजिक दूरी बरकरार रखी जाए. अगर किसी बच्चे को खांसी या जुकाम है तो उन्हें स्कूल भेजने से रोका जाए. लगातार मास्क बच्चों को न पहनाया जाए. अगर कहीं बड़ा हॉल है और हवादार हैं तो वहां ज्यादा जरूरी नहीं है कि बच्चे मास्क पहनकर ही बैठें. हर क्लास के बाद इंटरवेल दें और उन्हें ओपन एरिया में थोड़ा टाइम दें. अभी कोशिश की जाए कि एक दिन छोड़कर उन्हें स्कूल बुलाया जाए. दरवाजे के हैंडल दूने पर मनाही हो और वहां प्लास्टिक कवर लाए जाएं. टॉयलेट में ये प्रयास किया जाए कि वो नल को बार—बार न छुएं. खाने को बच्चे स्कूल में शेयर करते हैं. ऐसे में टीचर को ये ध्यान रखना होगा कि वो ऐसा न करें. कैंटीन बंद की जाएं. पानी खुद का ही हो तो वो ज्यादा बेहतर है. कॉमन सोर्स पानी के लिए ठीक नहीं होगा.