आगरालीक्स…भक्त हुए बलिहारी, जब समुन्द्र लोक में सीप में बिराजे गिरधारी. गोवर्धन में लगे 11 हजार 551 किलो के व्यंजनों के दिव्य छप्पन भोग
दर्शन को हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
शंख, सीप और मोतियों से सजे समुन्द्र लोक के महल में सीप में विराजमान श्रीगिरिराजजी महाराज। हाथ ऊपर कर इस अलौकिक छवि को निहारते हजारों श्रद्धालु और श्रीहरि संग बरसाने की महारानी राधा रानी के जयकारे। भक्ति और उत्सव का यह संगम श्रीगिरिराजजी सेवा मण्डल द्वारा आयोजित छप्पन भोग महोत्सव में नजर आया। जहां समुन्द्र लोग के रूप में सजा महोत्सव स्थल बैकुन्ठ धाम से कुछ कम नहीं था। प्रातः से ही श्रीगिरिराजजी महाराज के इस अलौकिक दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी।
गोवर्धन तलहटी, आन्यौर परिक्रमा मार्ग स्थित श्री शरणानंद जी के आश्रम में आयोजित दिव्य छप्पन भोग महोत्सव में प्रातः द्वारिकाधीश मंदिर के महन्त शरदशंकर मुखिया जी ने गिरिराजजी महाराज का श्रंगार किया। ढोल नगाड़ों संग परिक्रमा मार्ग से महोत्सव स्थल तक मण्डल के सदस्य रजत कलश लेकर लेकर पहुंचे और विधि विधान के साथ उसे स्थापित किया। इसके उपरान्त कार्ष्णि गुरु शरणानन्द महाराज, हरिओमजी महाराज, मण्डल के संस्थापक नितेश अग्रवाल, बल्केश्वर महादेव मंदिर के महन्त कपिल नागर ने मंगला आरती की। महोत्सव का शुभारम्भ मथुरा के सांसद श्रीकांत शर्मा, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, स्वरुपानंद अधिकारी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलिक कर किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से मण्डल के संस्थापक नितेश अग्रवाल, सहसंस्थापक मयंक अग्रवाल, अध्यक्ष रविन्द्र गोयल, अजय सिंघल, अंकुर अग्रवाल, विशाल बंसल, नीरज अग्रवाल, चंद्रमोहन बंसल, असोक खंदौली, पुनीत अग्रवाल, विकास जैन, नीरज मित्तल, कुलभूषण गुप्ता, प्रदीप अग्रवाल, विजय, अजय शिवहरे, अवधेष अग्रवाल, मयंक जैन, विकास, वमुकुन्द गोयल, सुमित सिंघल, नीरज गर्ग, आशी अग्रवाल, शिवानी, सीमा गोयल, मीनाक्षी, कल्पना, रुचि, ज्योति, साक्षी, कविता, रेखा माहेश्वरी, प्राची, रेनी, सारिका, अंजना, अनीता आदि उपस्थित थीं।
11 हजार 551 किलो के व्यंजनों से लगा छप्पन भोग
आगरा। श्रीगिरिराजजी का 11 हजार 551 किलों के व्यंजनों से छप्पन भोग लगाया गया। दोपहर 12 बजे से प्रारम्भ हुआ भंडारा देर रात तक चला, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। वहीं भजन संध्या में मण्डल के सदस्य भक्ति के रंग में ऐसे डूबे कि देर रात तक कीर्तन और नृत्य का सिलसिला भी चलता रहा।
जगमग रोशनी और सतरंगी फूलों से महका महोत्सव स्थल
आगरा। समुन्द्र लोक के सूप में सजाया गया महोत्सव स्थल कलकत्ता के सतरंगी फूलों से महक रहा था। द्वार पर भक्तों की अगुवाई करते रजत स्वरूप में सजे हाथी-हिरन और जगह-जगह रंग बिरंगे फूलों से लदे हरे पेड़ महोत्सव स्थल की शोभा बढ़ा रहे थे। सूरज ढलते ही जगमग रोशनी भी महोत्सव स्थल को सजाने के लिए तैयार हो गई।