आगरालीक्स…‘हार नहीं मानूंगा लेकिन रार नहीं ठानूंगा’… पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस की पूर्व संध्या में हुई अटल गीत गंगा. कवियों ने दी शानदार प्रस्तुतियां…
कवि हृदय पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल जी की पक्तियां हार नहीं मानूंगा लेकिन रार नहीं ठानूंगा… जब सुधीर नारायण के संगीत के सुरों में लिपटकर दर्शकों के सामने आईं तो हर दिल में ऊतर गईं। न सिर्फ वर्तमान राजनीति बल्कि सामान्य जीवन में भी कठिन परिश्रम करने व द्वेष और क्रोध को दूर रखने का संदेश देती इस संगीतमय प्रस्तुति के साथ अटल जी की हर रचना कुछ सीख दे रही था।
अटल गीत गंगा 2020 के तहत कॉसमॉस मॉल में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में संगीतज्ञ सुधीर नारायण ने जीवन की डोर छोड़, क्या खोया क्या पाया जग में…, नईं गांठ लगती है…, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं…, जैसी रचनाओं को संगीत में पिरोया तो हर दर्शक अटल जी की याद में खो गया।
छोटा हूं जिंदगी से पर मौत से बड़ा नहीं…
अटल जीत गंगा 2020 कार्यक्रम के तहत कवि सम्मेलन आयोजित कर स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को शहर के कवियों ने श्रद्धाजलि अर्पित की। अन्तर्राष्ट्रीय कवि सोम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित सभी कवियों की रचनाएं अटल जी समर्पित थीं। सोम ठाकुर ने मेरे भारत की माटी है, चंदन और अबीर… जैसी रचनाओं से जहां वीर सैनिकों को नमन किया वहीं छोटा हूं जिंदगी से पर मौत से बड़ा नहीं…, लौट ओ मांग के सिंदूर की कसम तुमको, नयन का सावन निमंत्रण दे रहा है… प्रस्तुत की वहीं कवियत्री रुचि चतुर्वेदी ने गीत नया लिखने वाले अब गीत तुम्हारे सोम हो गए, महादेव की नगरी वाले शब्द-शब्द अब ओम हो गए… प्रस्तुत की। योगी सूर्यनाथ ने खोजिएगा बाद में समूचे चंद्रमा पे… ज्योत्सना शर्मा ने चलो दिया बन जाएं डोर टूटे जब सांसों की … प्रस्तुत की।