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Ramlila Agra 2026: A beautiful and soulful enactment of Devarshi Narada’s infatuation was presented…#agranews

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आगरालीक्स…आगरा के रामलीला मैदान में चल रही रामलीला में हुआ देवर्षि नारद के मोह का सुंदर और भावपूर्ण मंचन. कल गुरुवार को होगा राम जन्मोत्सव का मंचन. जन्म लेंगे रघुकुल के चारों राजकुमार

“श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन, हरण भव भय दारुणम्…” के भक्तिमय स्वर, शंखनाद और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच उत्तर भारत की ऐतिहासिक श्री रामलीला महोत्सव में बुधवार को मंचीय लीला का शुभारंभ हुआ। अयोध्या नगरी में सजे रामलीला मैदान में जैसे ही प्रभु की लीला आगे बढ़ी, वातावरण में भक्ति की ऐसी सरिता बही कि श्रद्धालु स्वयं को त्रेतायुग की अयोध्या में उपस्थित महसूस करने लगे। मंचीय लीला में सर्वप्रथम देवर्षि नारद के मोह का सुंदर और भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान की भक्ति में लीन रहने वाले नारद जी को कामदेव पर विजय प्राप्त करने का अभिमान हो जाता है। उनके हृदय में उत्पन्न इस सूक्ष्म अहंकार को दूर करने के लिए स्वयं भगवान विष्णु लीला रचते हैं। भगवान विष्णु अपनी माया से ऐसा अनुपम नगर रचते हैं, जिसकी सुंदरता देखकर नारद जी भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं। नगर में मोहिनी नामक अत्यंत रूपवती कन्या का प्राकट्य होता है। मोहिनी के अद्भुत रूप को देखकर देवर्षि नारद का मन भी मोहित हो जाता है। वे भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें ऐसा सुंदर रूप प्रदान करें कि मोहिनी उन्हें ही अपना वर चुने।

भगवान विष्णु अपनी माया से नारद को वानर का रूप प्रदान कर देते हैं। माया के प्रभाव में नारद जी भगवान की लीला को समझ नहीं पाते। स्वयं को अत्यंत सुंदर समझकर वे मोहिनी के स्वयंवर में पहुंचते हैं, लेकिन जब उन्हें अपने वास्तविक स्वरूप का बोध होता है तो उनका मोह और अभिमान दोनों भंग हो जाते हैं।
इस प्रसंग के माध्यम से लीला में संदेश दिया गया कि भक्ति के मार्ग पर अहंकार का कोई स्थान नहीं है। प्रभु जब अपने भक्त का कल्याण करना चाहते हैं तो उसकी छोटी-सी भूल को भी अपनी लीला के माध्यम से दूर कर देते हैं।

धरती की करुण पुकार सुनकर द्रवित हुए भगवान
इसके बाद लीला ने अत्यंत भावुक रूप धारण कर लिया। रावण और उसके अत्याचारों से जब पृथ्वी कराह उठी तो पृथ्वी माता ने गौ का रूप धारण किया। ऋषि-मुनियों और देवताओं को साथ लेकर वे भगवान नारायण की शरण में पहुंचीं। धरती की व्यथा देखकर देवताओं के मुख से निकली करुण पुकार और पृथ्वी माता की पीड़ा ने वातावरण को भावुक कर दिया। लीला में रामचरितमानस की यह चौपाई सजीव हो उठी—
“जब जब होइ धरम कै हानी।
बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी॥
तब तब प्रभु धरि विविध सरीरा।
हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा॥”
देवताओं और पृथ्वी को भयभीत देखकर भगवान विष्णु का हृदय करुणा से भर उठता है। वे सभी को अभयदान देते हुए कहते हैं कि धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए वे स्वयं अयोध्या के राजा दशरथ के घर पुत्र रूप में अवतार लेंगे। आकाशवाणी के मंचन के साथ श्रद्धालुओं के बीच प्रभु श्रीराम के अवतरण की प्रतीक्षा का भाव जाग उठा। पूरे रामलीला मैदान में “जय श्रीराम” और “सियावर रामचंद्र की जय” के जयघोष गूंजने लगे। मंचीय लीला का निर्देशन नीरज चतुर्वेदी द्वारा किया जा रहा है। कलाकारों के सजीव अभिनय, भजन, संवाद और भावपूर्ण प्रस्तुति ने रामलीला मैदान को भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग दिया।

अयोध्या में गूंजेगा राम नाम, जन्म लेंगे रघुकुल के चारों राजकुमार
जिस शुभ घड़ी की प्रतीक्षा में अयोध्या नगरी सजी है, वह घड़ी अब आने वाली है। 1 अक्टूबर गुरुवार को रामलीला मैदान में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की भव्य लीला का मंचन होगा। चारों ओर मंगलगीत गूंजेंगे, शंखनाद होगा और अयोध्या नगरी में प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप का प्राकट्य होगा। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष/विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल एवं महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि अयोध्या नगरी बने रामलीला मैदान में राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्म की मनमोहक लीला प्रस्तुत की जाएगी। रामजन्म की घड़ी आते ही रामलीला मैदान में भक्ति का चरम दिखाई देगा। माताएं मंगलगीत गाएंगी, भक्त प्रभु के जन्म की खुशी में जयकारे लगाएंगे और अयोध्या नगरी “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठेगी। मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने आगरा की समस्त जनता एवं श्रद्धालुओं से परिवार सहित रामजन्मोत्सव में पहुंचने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के बाल रूप के दर्शन केवल लीला का दर्शन नहीं, बल्कि भक्ति और आस्था के उस क्षण का साक्षी बनना है, जिसकी प्रतीक्षा देवता और ऋषि-मुनि भी करते हैं। रामजन्मोत्सव के अवसर पर रामलीला मैदान में भजन, मंगलगान और जयघोष के बीच भक्तिभाव की अविरल धारा बहेगी।

Written by
Agraleaks Team

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