आगरालीक्स….आगरा की रामलीला में आज लाला चन्नोमल की बारहदरी से सीता स्वयंवर के लिये सवारी निकाली जायेगी जिसमें देश विदेश के विभिन्न राजा सवारियों में होंगें तथा रामलीला मैदान धनुष यज्ञ एवं परशुराम संवाद की आकर्षक एवं मनमोहक लीला स्वामी नीरज चतुर्वेदी के निर्देशन में की जायेगी।
श्री रघुनाथ जी की मनमोहक छवि पर मोहित हुई जगत जननी
रामलीला मैदान में मिथिलानगरी बनी जनकपुरी में बनी पुष्प वाटिका अपनी अनोखी छंटा बिखेर रही थी। गौरा मंदिर और अहिल्या उद्धार के नए निराले दृश्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इससे पूर्व लाला चन्नोमल की बारहदरी से मुनि विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण घोड़ों की सवारी पर व मां जानकी अपनी चार सखियों के साथ रथ पर सवार होकर पुष्प वाटिका के लिये रावतपाड़ा जौहरी बाजार, बिजलीघर होती हुई रामलीला मैदान बनी जनकपुरी मिथिला नगरी में जाती हैं। मां जानकी, राम-लक्ष्मण के शोभायात्रा मार्ग पर अनेक जगह पुष्प वर्षा कर लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। रामलीला के पदाधिकारियों ने मां जानकी व भगवान राम की महिमा का वर्णन कुछ इस प्रकार किया सुनु सिय सत्य असीस हमारी । पूजिहि मन कामना तुम्हारी।
मैदान पर जानकी जी मां अम्बिका के मन्दिर में पूजा करती हैं तथा पूजा करते समय मां अम्बिका से भगवान श्री राम को अपने पति के रूप में मांगती हैं। मां अम्बिका पूजा से प्रसन्न होती हैं, प्रसन्न होकर मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम को उनके पति के रूप में देने का वरदान देती हैं।रामलीला मैदान में लीला के प्रारंभ में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम व लक्ष्मण मुनि विश्वामित्र के साथ यज्ञ पूर्ण करके जनकपुरी जाते हैं। जनकपुरी के मार्ग में एक शिला मिलती है। शिला को देखकर भगवान राम विश्वामित्र जी की आज्ञा से उस शिला पर अपने चरण रज प्रदान करते हैं । चरण रज से गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या जी का उद्धार हो जाता है। श्रृंगार बड़ा ही मनमोहक था।