आगरालीक्स …आगरा से दुलर्भ प्रजाति के बटागुर कछुआ रेड क्राउंड रूफ टर्टल या लाल तिलकधारी सिंगापुर और थाईलैंड सप्लाई किए जा रहे थे, तस्करो के साथ 23 कछुओं को पकडा गया है, इन कछुओं की मीट सिंगापुर और थाईलैंड में खाई जाती है और इसकी कीमत दो लाख तक है।
एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने आगरा कैंट स्टेशन से गिरोह के सरगना अजय सिंह निवासी नई आबादी जैसवाल कुंज नगला मोहनलाल नराइच और राजा मंडी स्टेशन से दीपेंद्र निवासी गिहार कॉलोनी, भोगांव जिला मैनपुरी को दबोच लिया। दोनों के पास से दुर्लभ प्रजाति के 23 रेड क्राउंड रूफ टर्टल (कछुए)बरामद हुए हैं। एसटीएफ की पूछताछ में आरोपियों ने कछुओं को सिंगापुर, थाईलैंड और अन्य देशों में भेजने की बात कबूली। दोनों तस्करों को अदालत में पेशकर जेल भेज दिया गया।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी (डीएफओ) केके सिंह ने बताया कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों से वन्य जीवों की तस्करी की जा रही थी। गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ने को कार्रवाई जारी रहेगी।
बटागुर कछुए की है मांग
गिरोह सरगना अजय से पूछताछ में सामने आया है कि वह लाल तिलकधारी और चित्रा इंडिका प्रजाति के कछुए ही पकड़ता है। इन्हें ऊंचे दामों पर चेन्नई के रास्ते सिंगापुर, थाईलैंड और अन्य देशों में बेचता है। लाल तिलकधारी कछुए की कीमत भारत में करीब चार हजार रुपये जबकि सिंगापुर में डेढ़ लाख रुपये है। चित्रा प्रजाति के कछुए की भी अधिक मांग है।
चंबल नदी में ही हैं बटागुर कछुआ
बटागुर कछुआ के सिर पर लाल रंग की धारियां होती हैं। यह कछुआ वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में शेड्यूल एक में संरक्षित है। ये चंबल नदी के साफ पानी में पाए जाते हैं।
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