आगरालीक्स…ऋषि पंचमी मंगलवार 15 सितंबर को. ऐन्द्र योग और अभिजीत मुहूर्त का महासंयोग, सप्तऋषियों की पूजा से मिटेंगे पाप…
सनातन धर्म में ज्ञान और ऋषि परंपरा को समर्पित पर्व ऋषि पंचमी इस वर्ष 15 सितंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सप्तऋषियों का पूजन और व्रत किया जाता है। पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट से प्रारम्भ होगी और 16 सितंबर को सुबह 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। चूंकि 15 सितंबर को दोपहर के समय पंचमी तिथि विद्यमान है, इसलिए व्रत और पूजन इसी दिन मान्य होगा। ऋषि पंचमी पर सप्तऋषि पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 11:07 बजे से दोपहर 01:33 बजे तक रहेगा।
इस दिन के शुभ योग –
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इस दिन दोपहर 12:18 बजे तक ऐन्द्र योग रहेगा, जो शुभ कार्यों में सिद्धि देने वाला माना जाता है। इसके बाद वैधृति योग शुरू होगा। दिन का सबसे शुभ अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक रहेगा। अमृत काल सुबह 06:00 से 07:41 बजे तक रहेगा। इस दिन सूर्य सिंह राशि में उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में और चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार पूजा के लिए सबसे उत्तम समय 11:07 से 12:18 के बीच है, जब ऐन्द्र योग, अभिजीत मुहूर्त और ऋषि पंचमी पूजा मुहूर्त तीनों का संगम बन रहा है।
राहुकाल दोपहर 03:24 से 04:55 बजे तक रहेगा, जिसमें नया कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।
महत्व और मान्यता –
सप्तऋषि – कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ – को वेदों का ज्ञान प्रसारित करने वाला और गोत्र व्यवस्था का आधार माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है तथा ज्ञान और वंश वृद्धि होती है। विशेष रूप से महिलाओं द्वारा यह व्रत आत्मशुद्धि के लिए रखा जाता है।
पूजा विधि – सुबह स्नान कर सप्तऋषियों की स्थापना कर फल, फूल, धूप-दीप से पूजन करें और इस मंत्र से अर्घ्य दें –
कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥
दहन्तु पापं सर्वं गृह्णन्त्वर्घ्यं नमो नमः॥
इस दिन हल से जोते हुए खेत का अन्न न खाने की परंपरा है।
