आगरालीक्स… आगरा के खान-पान के शौकीन लोगों की पसंद सेठगली में आप कब से नहीं गए हैं। अब यहां पहले जैसी सुगंध नहीं उठती। न भीड़ रहती। आज हम जानेंगे क्या हाल हैं इस प्रमुख गली का।
आस-पास के जिलों से मिठाई लेने आते थे लोग

सेठगली में एक समय आगरा ही नहीं आस-पास के जिलों के खान-पान के शौकीन लोगों की पहली पसंद थी। सुबह बेढ़ई-कचौड़ी के नाश्ते के साथ मनपंसद मिठाई मिला करती थी। सेठगली में मिठाई की आठ-दस दुकानें हुआ करती थीं। इन दुकानों पर हर समय भीड़ लगा करती थी।
मिठाई की दुकानों के साथ रेस्टोरेंट की सुविधा थी
सेठगली के डा. सुरेश चंद्र बताते हैं कि सेठगली में रमन भल्ला की दुकान थी। मुकेश भल्ले वालों ने दुकान को रेस्टोरेंट बना दिया था, जहां लोग बैठकर अपनी पसंद की मिठाई, भल्ले आदि खाते थे। साथ में पैक कराकर ले जाते थे।
जसवंत टॉकीज के झीने से भी रास्ता था सेठगली का
उन्होंने बताया कि जसवंत टॉकीज के अंदर से झीने में होकर सेठगली में आने का रास्ता था, यहां से भी काफी लोग आते थे। इसी झीने के समीप डा. अशोक गर्ग का क्लीनिक था, जो कोरोना काल के बाद बंद हो गया है। वह अपने घर से ही मरीजों को देखते हैं।
सेठ गली कई मोहल्लों और रास्तों से हुई है जुड़ी
सेठगली से होकर गुजरने वाले रास्ते की गलियां कई मोहल्लों को जोड़ती हैं। रावतपाड़ा की ओर आने वाले रास्ते से आने पर दुकानों के बीच पहली गली मानपाड़ा होते हुए अन्य मोहल्लों में चली जाती है। अन्य गलियां भी इसी प्रकार जुड़ी हैं। कागजवालों के बीच की गली नाला रोशन मोहल्ला, रॉक्सी टाकीज से जोड़ती हैं। जसवंत टॉकीज का झीना फुव्वारा, हींग की मंडी से लोगों को जोड़ता था।
कागज कारोबार भी हो गया है अब कम

आगरा की सेठगली में कागज का काम भी बड़े पैमाने पर होता था। शादी कार्डों की छपाई होती थी। कागज हर किस्म का मिलने के कारण दूरदराज से लोग खरीदने आते थे।
शादी के कार्डों की तुरन्त होती थी छपाई
शादी-विवाह के कार्डों की छपाई सस्ती औऱ सुंदर होती थी, जो अब भी होती है लेकिन पहले की अपेक्षा कम हो गई है।
पार्किंग की कमी से लोगों का हुआ मोह भंग
सेठगली में भीड़ और पार्किंग की व्यवस्था कम होने पर परिवार समेत लोगों ने धीरे-धीरे आना कम कर दिया।
पॉश कॉलोनियों और एमजी रोड पर खुली दुकानों से भी पड़ा असर
सेठगली के कुछ प्रमुख दुकानदारों ने पहले अपनी कुछ दुकानें, बेलनगंज, कमला नगर, सदर, एमजी रोड समेत अन्य स्थानों पर खोलीं, जहां ग्राहकों को बैठने की सुविधा के साथ क्वालिटी को भी उसी प्रकार का रखा।
गिनी-चुनी दुकानें हैं अब मिठाई की
इससे सेठगली में खान-पान और मिठाई के शौकीनों का धीरे-धीरे आना कम हो गया। सेठगली में अब मोरमुकुट भल्लेवाले के अलावा तीन-चार दुकानें मिठाई की औऱ एक लस्सी की रह गई है।
