आगरालीक्स… शनि अमावस्या कल 30 अप्रैल को है। प्रतिकूल शनि को अनुकूल कैसे करें। न्याय के देवता के प्रसन्न होने पर प्राप्त होती है सुख-समृद्धि।
श्रीगुरु ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक शनि देव को वृद्धावस्था का स्वामी कहा गया है, जिस घर में माता पिता व वृद्ध जनों का सम्मान होता है उस घर से शनि देव बहुतप्रसन्न होते हैं।

पं. हृदय रंजन शर्मा
-शनि को दरिद्र नारायण भी कहते हैं इसलिए दरिद्रो की सेवा से भी शनि प्रसन्न होते हैं।
– असाध्य व्यक्ति को काला छाता, चमडे के जूते चप्पल पहनाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
-शनि देव को उड़द की दाल की बूंदी के लड्डू बहुत प्रिय है अत: शनिवार को लड्डू का भोग लगाकर बांटना चाहिए।
-शनिवार को तेल मालिश कर नहाना चाहिए।
-लोहे की कोई वस्तु शनि मंदिर दान करनी चाहिए. वह वस्तु ऐसी हो जो मंदिर के किसी काम आ सके।
-शनि से उत्पन्न भीषण समस्या के लिए भगवान भोलेनाथ व हनुमान जी की पूजा एक साथ करनी चाहिए. शनि चालीसा, शिव चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बाहुक व हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
-शनि सम्बन्धी कथा पढ़े।
-नीलम रत्न के साथ पन्ना रत्न भी धारण करें।
-हर शनिवार और मंगलवार को काले कुत्ते को मीठा पराठा खिलायें।
-भैरव उपासना भी अनिष्ठो में सर्वाधिक लाभदायक है।
-ताप के रूप में शनिवार का श्री हनुमान जी व शनि मंदिर में पीपल का पेड़ हो तो संध्या के समय दीपक जलना शनि, हनुमान और भैरव जी के दर्शन अत्यंत लाभकारी है।
-शनिवार को काले तिल का कपडछन पावडर चुटकी व दो बूंद सरसों का तेल पानी में डालकर तिलातेल स्नान करें।
-शनि मंदिर में जाकर कम से कम परिक्रमा व दंडवत प्रणाम करें।
-16 शनिवार सूर्यास्त्र के समय एक पानी वाला नारियल, ५ बादाम, कुछ दक्षिणा शनि मंदिर में चढायें।
-शनि की शुभ फल प्राप्ति के लिए दक्षिण दिशा में सिराहना कर सोयें. व पश्चिम दिशा में मुख कर सारे कार्य करें व अपने देवालय में शनि काआसन अवश्य बनायेँ।
-प्रति माह की अमावस्या आने से पूर्व अपने घर व व्यापार की सफाई व धुलाई अवश्य करें व तेल का दीपक जलाएं।
-शनि अमावस्या, शनि जयंती या शनिवार को बन पड़े तो शनि मंदिर में नंगे पैर जाएं।
– शनिवार व मंगलवार को क्रोध न करें।
-गुड़ व चनें से बनी वस्तु भोग लगाकर अधिक से अधिक लोगों को बांटना चाहिए।