आगरालीक्स.(Agra News 18th May).( पाजिटिव स्टोरी).., आगरा में कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही थी, आक्सीजन का स्तर 66 तक पहुंचने पर उम्मीद छोड चुके थे, तब कोरोना को मात दी। शांतिवेद इंस्टीटयूट आफ मेडिकल साइंसेज, आगरा की जिंदगी बचाने वाली स्टोरी।
23 अप्रैल को 53 साल की महिला मरीज को एक निजी कोविड हास्पिटल से शांतिवेद इंस्टीटयूट आफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती किया गया। उस समय आक्सीजन का स्तर 66 था, सांस लेने में परेशानी, ब्लड प्रेशर सामान्य से कम और सीटी स्कोर 25 में से 22 घातक था। उन्हें बाईपेप पर रखा गया लेकिन आक्सीजन के स्तर में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद इन्वेसिव वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया।
आईसीयू केयर, प्रोन पाजिशन और फिजियोथैरेपी से 10 दिन बाद बाईपेप पर शिफ्ट
उम्मीद बहुत कम थी लेकिन छोडी नहीं। आईसीयू केयर देना शुरू किया, प्रोन पाजिशन पर मरीज को लिटाने के साथ फिजियोथैरेपी कराई, 10 दिन बाद तबीयत में सुधार होने पर वेंटीलेटर से बाईपेप पर शिफ्ट कर दिया। 11 मई को बाईपेप भी हट गया और रूम में शिफ्ट कर दिया। वे अब अपने परिवार के साथ हैं।
दिल्ली से पिता को शांतिवेद लेकर आए और बच गई जान
संजीव गोयल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिता जी की तबीयत बहुत खराब थी, मेरी बहन डॉ दीप्तिमाला ने उन्हें दिल्ली से आगरा शांतिवेद हॉस्पिटल में शिफ्ट करा दिया। डॉ श्वेतांक प्रकाश की लीडरशिप में इलाज किया गया, वे पूरी तरह से ठीक हो गए।
