आगरालीक्स…आगरा के बटेश्वर में कन्या को हुए थे साक्षात शिव दर्शन। भगवान शिव के हैं यहां 101 मंदिर। श्रावण मास में कांवड़ चढ़ाने आते हैं लाखों शिव भक्त। जाने क्या है महत्व…
ब्रह्मलालजी महाराज के नाम से जाना जाता है बटेश्वर

बटेश्वर को ब्रह्मलालजी महाराज के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिवजी का शिवलिंग रूप के साथ-साथ पार्वती, गणेश का मूर्ति रूप भी यहां है। श्रावण मास में कासगंज से गंगाजी का जल भरकर लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का कांवड़ यात्रा के माध्यम से अभिषेक करते हैं।
संतानों की शादी का दो राजाओं ने लिया था संकल्प
इसके बारे में एक प्राचीन कथा है कि दो मित्र राजाओं ने संकल्प किया कि हमारे पुत्र अथवा कन्या होने पर दोनों का विवाह करेंगे। परंतु दोनों के यहां पुत्री संतानें हुईं।
एक राजा की कन्या ने यमुना में लगा दी थी छलांग
एक राजा ने ये बात सबसे छिपा ली और विदाई का समय आने पर उस कन्या ने, जिसके पिता ने उसकी बात छुपाई थी, अपने मन में संकल्प किया कि वह यह विवाह नहीं करेगी और अपने प्राण त्याग देगी, उसने यमुना नदी में छलांग लगा दी
जल के बीच भगवान शिव ने कन्या को दर्शन दिए
कन्या के जल के बीच में उसे भगवान शिव के दर्शन हुए और उसकी समर्पण की भावना को देखकर भगवान ने उसे वरदान मांगने को कहा। तब उसने कहा कि मुझे कन्या से लड़का बना दीजिए तो मेरे पिता की इज्जत बच जाएगी। इसके लिए भगवान ने उसे निर्देश दिया कि तुम इस नदी के किनारे मंदिर का निर्माण करना।
इसके बाद से ही यहां मंदिर बना
कहा जाता है यह मंदिर उसी समय से मौजूद है। यहां पर कांवड़ यात्रा के बाद जल चढ़ाने पर अथवा मान्यता करके जल चढ़ाने पर पुत्र संतान की प्राप्ति होती है।
बटेश्वर में 700 किलो तक के घंटे हैं
इस मंदिर की एक विशेषता यह है कि यहां एक-दो किलो से लेकर 500-700 किलोग्राम तक के घंटे टंगे हुए हैं।
श्रावण मास से महाशिरात्रि तक चलती है कांवड़ यात्रा
यहां की विशेषता यह है कि हजारों की संख्या में संन्यासियों के माध्यम से टोली बनाकर कावड़ यात्री चलते हैं। ये यात्रा लगभग 15 दिन चलती है। हरिद्वार से जल लेकर दिल्ली, पंजाब आदि प्रांतों में करोड़ों यात्री जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा लगभग पूरे श्रावण मास से लेकर शिवरात्रि तक चलती है।