आगरालीक्स(16th September 2021 Agra News)… आगरा में जैन समाज ने मनाई सुगंध दशमी. आचार्य ने कहा, आत्मा की शुद्धि के लिए इच्छाओं को रोकना तप. शहर के इन मंदिरों में हुई शांतिधारा.
गंगेगौरी बाग में मनाया गया सुगंध दशमी
श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर गंगेगौरी बाग बल्केश्वर में आचार्य श्री 108 आदित्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दसलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म को सुगंध दशमी के रूप में मनाया गया। सुबह श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। दशलक्षण पूजन पंडित सौरभ जैन शास्त्री ने कराई।
आचार्य श्री ने उत्तम तप धर्म के बारे में बताया
आचार्य श्री ने उत्तम तप धर्म के बारे में कहा कि जैन धर्म के अनुसार प्रत्येक प्राणी में अनंत संभावनाएं हैं। उनकी अभिव्यक्ति अनुकूल निमित्तों और साधना के बल पर होती है। प्रतिमा में छिपे भगवान की भांति आत्मा में परमात्मा है। आत्मा में ही परमात्मा है। यह जैन दर्शन का सूत्र वाक्य है। प्रत्येक प्राणी में परमात्मा की शक्ति विद्यमान है। इस शक्ति की अभिव्यक्ति के लिए तप साधना जरूरी है। उस आत्मा की अभिव्यक्ति ही परमात्मा की उपलब्धि है। यही धर्म साधना का मूल ध्येय है। स्वर्ण पाषाण को अग्नि में तपाया जाता है, तब उसकी कालिमा गलकर पृथक् होती है। स्वर्ण का शुद्ध स्वरूप निखर उठता है। वह हमारे गले का हार बन जाता है। जो व्यक्ति तप अनुष्ठान करता है, उसकी आत्मा कुन्दन बन जाती है|
रंगोली प्रतियोगिता में महिलाओं ने लिया भाग
दोपहर दो बजे रंगोली सजाओ प्रतियोगिता शास्त्र और दीपक सजाओ प्रतियोगिता हुई। इसमें महिलाओं ने प्रतियोगिता में बढ़ चढ़कर भाग लिया। विमल जैन,प्रवीन जैन, सचिन जैन, विनीता जैन,भावना जैन,आरती जैन, नेहा जैन आदि मौजूद रहीं।

नाई की मंडी में हुआ कार्यक्रम
श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर कटरा इतवारी खां नाई की मंडी में श्रीजी का अभिषेक और शंतिधारा पूजन की गई। पंडित विकास जैन शास्त्री ने बताया कि आत्मा की शुद्धि के लिए अपनी इच्छाओं को रोकना तप है। तप अंतरंग व बहिरंग दो प्रकार के होते हैं। बहिरंग-अनशन, उनोदर, व्रत परिसंख्यान, रस परित्याग, विविक्त शय्यासन, कायक्लेश, अंतरंग- प्रायश्चित, विनय वैयावृत्ति, स्वाध्याय व्यूत्सर्ग, ध्यान आदि बारह तप हैं। निर्मल मौठया, सुरेंद्र बैनाड़ा, अजित रांवका, राजेश सेठी, तरुण रांवका, पुष्पा जैन, सुनीता जैन, शशि जैन, संगीता जैन मौजूद रहीं।