
उन्होंने कहा कि स्कूल के बाद महिलाएं लिखना पढ़ना तो जैसे भूल जाती हैं। हर रोज लिखने की आदत डालें। अपने मनोभाव को शब्द प्रदान करें। इससे आपमें सकारात्मकता के साथ आत्मविश्वास बढ़ता है। आप जो हैं उसे बिना झिझके अभिव्यक्त करना सीखें। आप जितना बड़ा
सोचोगे उतना ही आगे बढ़ोगे।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि ब्रिग्रेडियर की धर्मपत्नी आशिमा श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि संकल्प संस्था की स्थापिका रश्मि मगन, पूनम सचदेवा ने सम्मलित रूप से दीप जलाकर किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में चांदनी ग्रोवर व निहारिका मल्होत्रा ने बुके देकर शिवांगी का स्वागत किया। संचालन पूनम सचदेवा ने किया। गरिमा हेमदेव, पुष्पा पोपटानी, माला, प्रीती बत्रा, रचना आग्रवाल, चांदनी ग्रोवर, विमला वर्मा, इवेन्ट्रिक इवेन्ट की शिखा जैन, शिखा जैन, आशू मित्तल, राशि गर्ग, सारिका कपूर, राशि पोपटानी, बेला सरीन, रिया मित्तल, रेशमा मगन, गुलजार आदि उपस्थित थीं
60-90 फीसदी हमारी बॉडी बोलती है
हम से ज्यादा हमारा शरीर बोलता। आप कैसे चलते हैं, कैसे उठते-बैठते हैं और किस अंदाज में बातें करते हैं। आपके मुंह से बोलने से ज्यादा (60-90 प्रतिशत) आपके हाव-भाव आपके व्यक्तित्व को परिभाषित करते हैं। कार्यशाला में शिवांगी ने बोलने, चलने और उठने बैठने के भी टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि फोटो खिंचवाते समय हमेशा कुछ सकारात्मक सोचें।
सवाल-जवाब भी हुए
इस मौके पर कई महिलाओं ने अपने खट्टे मीठे अनुभवों को साझा किया और शिवांगी से सवाल भी किए। लगभग 60 वर्षीय कोरी आनंद ने कहा कि खुश रहने के लिए क्यों, कब कहां जैसे प्रश्नात्मक शब्दों को हटा देना बहुत जरूरी है।
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