आगरालीक्स…प्रेग्नेंसी में बहुत जरूरी है थायराइड की नियमित जांच. आगरा की डॉ. अनुश्री रावत से जानिए इसके असंतुलित होने पर मां और शिशु के हेल्थ पर कितना पड़ता है प्रभाव
नियमित जांच करवाना बहुत जरूरी
थायराइड होने पर गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच करवाना बहुत जरूरी होता है। थायराइड ग्रंथि ट्राईआयोडोथायरोनिन और थायरोक्सिन नामक हार्मोन का उत्पादन करती है जो कि भ्रूण के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए प्रेग्नेंसी में थायराइड एक अहम भूमिका निभाता है। थायराइड का स्तर असंतुलित होने पर मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। यहां तक कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी थायराइड होने की आशंका रहती है। यदि थायराइड ग्रंथि कम एक्टिव हो तो इस स्थिति को हाइपोथायराइड कहते हैं। वहीं थायराइड ग्रंथि के अधिक सक्रिय होने की स्थिति को हाइपरथायराइड कहते हैं।
महिलाओं में सबसे ज्यादा थायराइड की आशंका
एक अहम बात यह है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को थायराइड होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है।यदि महिला को गॉइटर नामक बीमारी हो तो उसमें थायराइड होने के जोखिम बढ़ जाते हैं।अगर महिला के परिवार में ऑटोइम्यून थायराइड डिजीज जैसे कि ग्रेव्स डिजीज की हिस्ट्री रही है तो प्रेग्नेंसी के दौरान उसमें इन बीमारियों या थायराइड का खतरा बढ़ जाता है। टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में भी थायराइड का खतरा ज्यादा होता है।
गर्भावस्था में थायराइड के प्रभाव
यहां हम विस्तार से बताएंगे कि थायराइड के कारण गर्भवती महिला किस प्रकार प्रभावित हो सकती है :
हाइपोथायरायडिज्म
अगर हाइपोथायरायडिज्म का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह निम्न प्रकार से हानिकारक साबित हो सकता है :
प्रीक्लेम्पसिया या उच्च रक्तचाप
एनीमिया
गर्भपात
जन्म के समय शिशु का वजन कम
पूरी तरह से शिशु का मानसिक विकास न होना
मृत शिशु का जन्म
हाइपरथायरायडिज्म
हाइपरथायरायडिज्म का ठीक प्रकार से इलाज न करने पर इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है :
गर्भपात
समय से पूर्व जन्म
जन्म के समय शिशु का वजन कम
प्रीक्लेम्पसिया यानी उच्च रक्तचाप
थायराइड के अचानक और गंभीर लक्षण
अचानक ह्रदय गति का रुकना
प्रेग्नेंसी के दौरान थायराइड कैसे कंट्रोल करें
दवा लेने के अलावा आपको तनाव से भी दूर रहना है। तनाव से कोर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ जाता है जो कि थायराइड ग्रंथि को हार्मोन रिलीज करने से रोकता है।
वहीं गर्भावस्था में महिलाओं को शारीरिक गतिविधियां करते रहना चाहिए। योग और व्यायाम से थायराइड हार्मोन को संतुलित रखा जा सकता है।
चीनी, रिफाइंड अनाज और कैफीन आदि का सेवन कम करें। वहीं गॉइटर की बीमारी से बचने के लिए अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन युक्त चीजों को शामिल करें।
योग, दवा और स्वस्थ जीवनशैली की मदद से थायराइड को कंट्रोल किया जा सकता है और गर्भधारण भी किया जा सकता है।
थायराइड का पता टीएसएच के जरिए लगाया जाता है। गर्भावस्था में टीएसएच का सामान्य स्तर क्या होना चाहिए, इसे हम नीचे तालिका के जरिए समझा रहे हैं :
टीएसएच (MIU/L) कम अधिक
पहली तिमाही 0.1 2.5
दूसरी तिमाही 0.2 3.0
तीसरी तिमाही 0.3 3.0
अगर गर्भवती महिला में टीएसएच स्तर इतना या इसके बीच में रहता है, तो चिंता का विषय नहीं है। सामान्य महिलाओं में टीएसएच का स्तर 0.4-4mIU/L के आधार पर मापा जाता है।
थायराइड में क्या न खाएं
हाइपोथायरायडिज्म :
जंक फूड : आप बेशक स्वस्थ ही क्यों न हों, जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए। थायराइड की अवस्था में तो बिल्कुल नहीं।
सोया पदार्थ : सोयाबीन और सोया युक्त खाद्य पदार्थों में फाइट्रोएस्ट्रोजन पाया जाता है। यह थायराइड हार्मोंस के निर्माण में बाधा पहुंचाता है। इसलिए, टोफू, टेम्पेह व सोया दूध जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
ग्लूटेन : ब्रेड, पास्ता व बियर आदि में ग्लूटेन की मात्रा अधिक होती है। अगर आपको हाइपोथायरायडिज्म है, तो इनका सेवन न करें।
पेय पदार्थ : कॉफी, ग्रीन-टी व शराब से दूरी बनाए रखें।
कुछ फल व सब्जियां : ब्रोकली, पालक, गोभी, आड़ू व नाशपाती आदि का सेवन न करें।
हाइपरथायरायडिज्म :
अधिक आयोडीन : इस अवस्था में अधिक आयोडीन लेने से समस्या और बढ़ सकती है। सीफूड में आयोडीन भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही डेयरी उत्पादों व अंडे के पीले हिस्से को भी आयोडीन का मुख्य स्रोत माना गया है।
ग्लूटेन : यह एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो गेहूं व सूजी आदि में पाया जाता है।
प्रोसेस्ड फूड व शुगर : जैम, जेली, कुकीज व पैस्ट्री जैसे प्रोसेस्ड फूड व शुगर से भरपूर खाद्य पदार्थों से दूर ही रहें।
जंक फूड : हाइपोथायरायडिज्म हो या हाइपरथायरायडिज्म जंक फूड न ही खाएं तो बेहतर होगा।
नोट : गर्भावस्था में थायराइड होने पर क्या खाना है और क्या नहीं, इस बारे में सबसे बेहतर डॉक्टर ही बता सकता है। इसलिए, यहां बताए गए डाइट प्लान को फॉलो करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर पूछ लें।
बेशक, गर्भावस्था के दौरान थायराइड होना चिंता का कारण है, लेकिन समझदारी दिखाकर और सावधानी बरत कर इस समस्या से निपटा जा सकता है।सुरक्षित और स्वस्थ गर्भावस्था के लिए नियमित रूप से थायराइड की जांच करवाते रहें।इस विषय से सम्बंधित अधिक जानकारी केलिए मिलिए डॉक्टर अनुश्री रावत से , आगरा वुमन वैलनेस सेंटर , आगरा।
DR. ANUSHREE RAWAT
CONSULTANT OBSTETRICIAN AND GYNAECOLOGIST.
AGRA WOMAN WELLNESS CENTRE
9826702138