आगरालीक्स ….निदा फाजली को प्यार ने शायर बनाया था। उनके निधन पर टीएलएफ, आगरा ने श्रदृधांजलि दी, कॉलेज में निदा फाजली के आगे की पंक्ति में एक लड़की बैठा करती थी। उससे उन्हें लगाव महसूस होने लगा था। पर एक दिन नोटिस बोर्ड पर पढ़ने को मिला, “Miss Tondon met with an accident and has expired”। निदा का दिल रोने लगा। पर उन्हें महसूस हुआ कि उन्होंने अब तक कुछ भी ऐसा नहीं लिखा जो उनका यह गम बयां कर सके। एक सुबह वह एक मंदिर के पास से गुजर रहे थे। वहां उन्होंने किसी को सूरदास का भजन मधुबन तुम क्यौं रहत हरे? बिरह बियोग स्याम सुंदर के ठाढ़े क्यौं न जरे? गाते सुना। इसमें कृष्ण के मथुरा से द्वारका चले जाने पर उनके वियोग में डूबी राधा और गोपियां फुलवारी से पूछ रही होती हैं ऐ फुलवारी, तुम हरी क्यों बनी हुई हो? कृष्ण के वियोग में तुम खड़े-खड़े क्यों नहीं जल गईं? निदा को लगा कि उनके अंदर दबा गम का सागर बांध तोड़ कर निकल पड़ा है। फिर उन्होंने कबीरदास, तुलसीदास, बाबा फ़रीद आदि को पढ़ा। उनसे प्रेरित होकर सरल-सपाट शब्दों में लिखना सीखा।
टीएलएफ के निदेशक ने अशोक जैन सीए ने कहा के निदा साहब स्पष्ट और बेबाक टिप्पणी करते थे, पवन आगरी ने उनके साथ बिताए पलों की यादें ताजा की। इख्तियार जापफरी ने कहा कि उनके बोल हर किसी को अपना बना लेते थे। इस दौरान वत्सला प्रभाकर, समी आगाई, सुदर्शन दुआ, डॉ ह्रदेश चौधरी, सुनील जैन, संदेश जैन मौजूद रहे।
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