आगरालीक्स… आगरा में एक विधानसभा सीट से भाजपा का टिकट लेने के लिए पिता-पुत्र में ही जंग छिड़ी हुई है। कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।
बेटे के अनुरोध को ठुकरा दिया पिता ने
आगरा के राजनैतिक हलकों में आजकल एक पिता-पुत्र चर्चाओं में हैं। पिता और पुत्र दोनों ही एक विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। बेटा परिवार में कई बार पिता से अनुनय-विनय कर चुका है कि अब वे अपना दावा करना बंद करें और उसे अपने राजनैतिक उत्तराधिकारी के रूप में चुनाव लड़वाएं। दूसरी ओर पिता किसी भी तरह अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं हैं, उनका कहना है कि चुनाव तो वे हर कीमत पर लड़ेंगे।
दोनों नेता भाजपा संगठन के संपर्क में
एक ही सीट पर पिता तथा पुत्र की दावेदारी का मामला भाजपा का है। पिता-पुत्र दोनों ही भाजपा नेताओं तथा संगठन के संपर्क में हैं। खुद को प्रत्याशी बनाए जाने के लिए प्रयासरत है। मजे की बात यह है कि दोनों ही पूर्व में चुनाव लड़ चुके हैं। पिता विधायक तथा प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हैं। पुत्र भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय है।

घऱ में ही तय कर लें कौन लड़ेगा चुनाव
भाजपा में पिता तथा पुत्र दोनों के चाहने वालों की संख्या है। भाजपा के कुछ नेताओं ने पुत्र को समझाया कि अपने घर में पहले तय कर लें कि दोनों में से कौन चुनाव लड़ेगा। एक ही घर के दो लोगों को टिकट नहीं दी जा सकती।
परिचित-रिश्तेदारों से पिता को मनवाने की कोशिश
पता चला है कि बेटे ने पिता से निवेदन किया कि वे कई बार विधायक रह चुके हैं, अब बेटे को आगे बढ़ने का मौका दें तो पिता किसी तरह मानने को तैयार नहीं है। बेटा भाजपा में पिता के शुभचिंतकों, पारवारिक मित्रों तथा रिश्तेदारों से गुहार लगा रहा है कि किसी तरह पिताजी को समझाएं कि वह टिकट के लिए दावेदारी न करें।
पिता के कुछ परिचितों तथा मित्रों ने इस संबंध में पिता से बात की कि अब बेटे को आगे बढ़ाएं तथा खुद टिकट के लिए दावेदारी न करें।
अभी बूढ़ा नहीं हो गया हूं
पिता ने सभी मिलने वालों तथा परिचितों को दो टूक कह दिया कि अभी वह बूढ़े नहीं हुए हैं। चुनाव तो वही लड़ेंगे और हर कीमत पर लड़ेंगे। बेचारा बेटा अभी भी किसी चमत्कार की आशा में है कि किसी प्रकार पिता का मन बदल जाए, पिता उम्मीदवारी छोड़ दें ताकि उसके लिए आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो सके।
सीट पर दावेदारों की लगी है लंबी लाइन
हालांकि अभी यह तय भी नहीं है कि पार्टी पिता या पुत्र को उम्मीदवार बनाएगी भी या नहीं। क्योंकि जिस सीट से पिता तथा पुत्र दावेदारी कर रहे हैं, उस सीट पर टिकट मांगने वालों की एक लंबी फेहरिश्त है।