आगरालीक्स …आगरा में पेट्रोल पंप में चिप लगे होने की आशंका पर एसटीएफ ने डेरा डाल दिया है, संजय प्लेस स्थित पेट्रोल पंप को सील कर दिया गया, टीम छापेमार कार्रवाई कर रही है।
टीम ने शुक्रवार को संजय प्लेस स्थित आजाद पेट्रोल पंप को चेक किया, टीम ने घटतौली की आशंका पर पेट्रोल पंप को सील कर दिया है, इसके बाद कई और जगह टीम छापेमार कार्रवाई कर रही है।
चार टीमें गठित
डीएम ने मंगलवार को जिले के हर पेट्रोल पंप की जांच के आदेश जारी किए। जांच के लिए एसीएम के नेतृत्व में चार टीमों का गठन किया गया है। टीम में ऑयल कंपनी, आपूर्ति विभाग और बांट-माप के अधिकारियों अथवा कर्मचारियों को शामिल किया गया है। सभी टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वह जनपद के एक-एक पेट्रोल पंप की जांच करें। जिस पेट्रोल पंप पर घटतौली पकड़ी जाए उसे तुरंत सीज कर दिया जाएगा। और दोषियों को गिरफ्तार किया जाए।
ये टीमें करेंगी कार्रवाई
एसीएम प्रथम की अध्यक्षता में बनी टीम तहसील किरावली व नगर क्षेत्र के पेट्रोल-डीजल पंपों की जांच करेगी। एसीएम द्वितीय की अध्यक्षता में गठित टीम तहसील एत्मादपुर व शहर के पेट्रोल पंपों की जांच करेगी। एडीएम नागरिक आपूर्ति की अध्यक्षता में गठित टीम तहसील फतेहाबाद व बाह सहित समस्त नगर क्षेत्र एवं जिला पूर्ति अधिकारी की अध्यक्षता में गठित टीम तहसील सदर व खेरागढ़ सहित नगर क्षेत्र के पेट्रोल-डीजल पंपों की जांच करेगी। सभी टीमें अभियान चलाकर 10-10 पंपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौपेंगी।
पेट्रोल-डीजल में मिलावट
अधिकारियों के मुताबिक पेट्रोल व डीजल में साल्वेंट, केरोसिन की मिलावट आमतौर पर की जाती है। दूरदराज के इलाकों में घटतौली व मिलावट के मामले ज्यादा सामने आते हैं। जिला पूर्ति कार्यालय और बांट-माप कार्यालय लगातार पंपों पर मिलावट व घटतौली की जांच करें तो लाखों उपभोक्ताओं को हर साल करोड़ों रुपए का चूना लगने से बचाया जा सकता है।
इलेक्ट्रिशयन ने बनाई चिप
रविंद्र इलेक्ट्रिशयन ने ये चिप डेवलप की थी जो पेट्रोल पंप की डिस्पेंसिंग मशीनों में लगाई जाती थी। इसकी कीमत तीन हजार रुपए है। चिप लगने के बाद मशीन 6% तक कम पेट्रोल सप्लाई करती थी।
इलेक्ट्रॉनिक चिप दो तरह की होती हैं। एक का इस्तेमाल रिमोट से होता है, जबकि दूसरी चिप बिना रिमोट के कोड नंबर से काम करती है।
– ये लोग ग्रीन सर्किट में चिप लगाकर खेल करते थे। कुछ जगह एमसीबी और कुछ जगह पैनल में सर्किट लगाया गया था। इस चिप के लगते ही ये पेट्रोल डिलिवरी पल्स को बढ़ा देती है, जिससे मशीन के मीटर पर पेट्रोल सप्लाई और रेट तो सही बताता है, लेकिन असल में इससे कम पेट्रोल मिलता है।
– रविंद्र ने पुलिस को बताया कि उसने यूपी के करीब एक हजार पेट्रोल पंप को यह चिप बेची थी। एएसपी के मुताबिक, रिमोट के जरिए पेट्रोल सप्लाई की लिमिट तय की जाती थी। अगर कोई कस्टमर एक लीटर पेट्रोल लेता था तो उसे हकीकत में 940 ml पेट्रोल ही मिलता था। यानी कस्टमर को 60 ml का नुकसान होता था।
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