
25 फरवरी को विहिप के महानगर उपाध्यक्ष अरुण माहौर की बीच बाजार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके विरोध में एमजी रोड पर जाम लगाया था। पुलिस ने भाजपा के जिलाअध्यक्ष को हिरासत में ले लिया था, लेकिन उन्हें छोड दिया गया। वहीं, 28 फरवरी को जयपुर हाउस में शोक सभा आयोजित की गई। साध्वी प्राची के शोक सभा में शामिल होने से मामला गर्मा गया, भड़काऊ भाषण देने के आरोप में 12 मार्च को भाजपा नेत्री कुंदनिका विहिप के जिलामंत्री अशोक लवानिया और एबीवीपी के प्रांत प्रमुख शशांक चौधरी के गैर जमानती वारंट जारी कर दिए गए। भाजपा और आरएसएस ने अरुण माहौर की हत्या के विरोध में महाघेराव का ऐलान किया है। केंद्रीय मंत्री डॉ राम शंकर कठेरिया के नेत्रत्व में महाघेराव होगा। इससे पहले पुलिस ने एमजी रोड पर लगाए गए जाम में कई और हिंदूवादी संगठनों के नेताओं के नाम मुकदमे में खोल दिए हैं।
इन्हें किया गया चिन्हित
अविनाश राणा, नंद किशोर वाल्मीकि, सोनू धाकड, राजेंद्र गर्ग, रवि यादव, संजय मल्होत्रा, गौरव गुप्ता, पंकज पाठक, दीपक अग्रवाल, संदीप उपाध्याय, प्रदीप चाहर, दिग्विजय नाथ तिवारी, ऋषि सिसादिया, चिंटू पंडित, सोनू छाकड को चिन्हित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री तोडेंगे प्रोटोकॉल
रविवारको अपने निवास खन्दारी पर आयोजित बैठक में केन्द्रीय मंत्री डॉ. रामशंकर कठेरिया ने कहा है कि अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अरुण माहौर जैसे कार्यकर्ताओं का बलिदान रंग लाएगा। उन्होंनेकार्यकर्ताओं से 18 मार्च को कलेक्ट्रेट के होने वाले महाघेराव में पहुँचने का आह्वानकिया। कहा कि जरूरत पड़ी तो मैं फिर प्रोटोकॉल तोड़ूंगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की सपा सरकार में कोई भी सुरक्षित नहीं है। दो महीने के अन्दर अकेले आगरा में 18 हत्याएं होचुकी हैं। हत्याओं का सबसे ज्यादा शिकार दलित हुए हैं। सपा-बसपा को दलितों की कोई चिन्तानहीं हैं।
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