आगरालीक्स… कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे, यश भारती से सम्मानित 92 साल के कवि गोपाल दास नीरज ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूछा है कि पेंशन क्यों रोक दी है। पदम भूषण और लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित कवि गोपाल दास नीरज को 1994 में उत्तर प्रदेश का सबसे पहला यश भारती सम्मान दिया गया था। इसके तहत ताउम्र 50 हजार रुपये पेंशन मिलती है, भाजपा की सरकार आने के बाद यश भारती सम्मान के लाभार्थियों की जांच के साथ पेंशन पर रोक लगा दी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कवि गोपाल दास नीरज को यश भारती पुरस्कार से सम्मानित करते हुए 11 लाख रुपये और ताउम्र 50 हजार रुपये हर महीने पेंशन (अगर पेंशन लेना चाहें तो) की शुरूआत की थी। हरिवंश राय बच्चन, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, 2006 में अभिषेक बच्चन से लेकर तमाम पर्सनेलिटी को यह अवार्ड दिया गया। सपा के बाद बसपा सरकार के आते ही यश भारती पुरस्कार बंद कर दिए गए थे। 2012 में सपा सरकार में सीएम अखिलेश यादव ने यश भारती पुरुस्कार दोबार से शुरू किए।
दो साल में 111 यश भारती
सीएम अखिलेश यादव ने 2015 में 57 और 2016 में 54 पर्सनेलिटी को यश भारती पुरुस्कार से सम्मानित किया, जिन्हें यह पुरुस्कार दिए गए, उन पर सवाल और यश भारती पुरुस्कार के चयन पर सवाल उठने लगे।
यश भारती पुरुस्कारों की जांच, पेंशन हुई बंद
भाजपा सरकार आने के बाद यश भारती पुरुस्कार के चयन का विवाद गर्माने लगा, इसके बार सीएम योगी आदित्यनाथ ने यश भारती पुरुस्कार के चयन की जांच के आदेश दे दिए। साथ ही यश भारती पुरुस्कार से सम्मानित पर्सनेलिटी की पेंशन पर रोक लगा दी।
मेरी जांच कर लें, लेकिन पेंशन तो बंद ना करें
इसके बाद से यश भारती पुरुस्कार से सम्मानित कवि गोपाल दास नीरज की पेंशन भी बंद हो गई है। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को दो बार पत्र लिखा है, इसमें उन्होंने लिखा है कि आखिर उन जैसे लोगों यश भारती से सम्मानित की पेंशन क्यों रोख रखी है, सरकार को जांच करानी हैं तो कराएं लेकिन जल्दी ।
इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में
बॉलीवुड के लिए 100 से ज्यादा गीत लिख चुके कवि गोपाल दास नीरज
मेरा नाम जोकर, शर्मीली और प्रेम पुजारी जैसी फिल्मों के गीतों के लिए जाने जाते हैं।
इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में।
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