
आगरालीक्स …आगरा में बंदरों के आतंक से छुटकारे के लिए नसबंदी कराई गई, इसमें पकडी गई तमाम मादा बन्दर (बन्दरिया) ऐसी थी जिनके पास 2-3 माह के बच्चे गोदी मे होने के बाबजूद गर्भवती निकलीं, अब शहर के अन्य इलाकों में वाइल्ड लाइफ एसओएस के बंदरों की लेप्रोस्कोपिक विधि से नसबंदी के प्रोजेक्ट का दायरा बढाया जाएगा।
मंगलवार को मण्डलायुक्त चन्द्रकान्त ने कमिश्नरी में वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा तैयार किये गये प्रजेन्टेशन को देखने के पश्चात उन्होंने कहा कि इसकी शुरूआत एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गयी थी जिसके फलस्वरूप और प्रयोग सफल होने पर इसका दायरा बढ़ाया जायेगा। जिससे अधिक से अधिक मोहल्लों में बन्दरों की बढ़ती आबादी को नियन्त्रण किया जा सकेगा। आगरा महानगर में बन्दरों की जनसंख्या पर नियन्त्रण करने के लिए आगरा विकास प्राधिकरण के साथ वन्य जीव संरक्षण एस.ओ.एस. संस्था ने जो महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था, उसी के क्रम में एस.एन. मेडीकल कालेज परिसर तथा शहर के अलग-अलग स्थानों पर रखे गये पिजरांे से 552 बन्दरों को पकड़कर उनकी नसबन्दी करायी गयी और उन्हें सम्बन्धित क्षेत्र में पुनः छोडा गया।
जिलाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि आगरा में बन्दरों की बढ़ती जनसंख्या की समस्या इतनी गम्भीर है, कि समस्या से निजात पाने के लिए एक साल से प्रयासरत जिला प्रशासन के सहयोग से वाइल्ड लाइफ एसओएस बन्दरों को पकड़ने का अभियान 20 जनवरी को एस0एन0मेडिकल कालेज से शुरूआत की गयी थी इसके पश्चात कलेक्ट्रेट, भेंरोनाला, नूरी गेट, बेलनगंज सहित ऐसे स्थानों पर इस पिंजरे को रखा गया जहाॅ पर बन्दरों की संख्या अधिक थी। उन्होंने बताया कि आगरा में बन्दरों की बढ़ती जनसंख्या से आगरावासी काफी परेशान थे, जिससे निजात पाने के लिए पुनः कार्यवाही की शुरूआत की जायेगी, जिसके अन्तर्गत एक साइन्टीफिक तरीके से बन्दरों की नसबन्दी आधुनिक तरीके से की जायेगी, जिससे बन्दरों को भी किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इस कार्य के होने से महानगर की जनता को बन्दरों की बढ़ती जनसंख्या से निजात मिलेगी और एक सीमित संख्या में बन्दर रहने से ये नुकसान भी कम पहुचायंेगे, जो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी ।
वाइल्डलाइफ एसओएस के चेयरमैन कार्तिक सत्यनारायण तथा निदेशक बैजूराज ने सर्जरी की गतिविधियों का प्रजेन्टेशन प्रस्तुत किया। वाइल्ड लाइफ एस.ओ.एस. के चेयरमैन कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि पूर्व में जो बन्दर पकड़े गये थे, उसमें से मादा बन्दर (बन्दरिया) थीं, जिनके पास 2-3 माह के बच्चे गोदी मे होने के बाबजूद गर्भवती निकलीं जो हैरानी की बात है । उन्हांेने बताया कि यदि बन्दर पकड़ने का यह निर्णय नहीं लिया जाता तो इनकी जनसंख्या एक साल मे तीन गुना बढ़ जायेगी, जिससे आम जनता को विभिन्न समस्याएं आयेंगी प्रथम फेस मंे 500 बन्दर पकड़ने की जो अनुमति मिली थी, उन्होंने यह भी बताया कि तीन किग्रा0 वजन से कम के बन्दरों की लैप्रोस्कोपी सम्भव नहीं है, इससे अधिक तथा 15 किग्रा0 तक वजन के बन्दरों की लैपोस्कोपी की जायेगी । उन्होंने यह भी बताया कि पकड़े गये बन्दरों को लैप्रोस्कोपी के पश्चात उनकी छाती पर टैटू भी लगाया जायेगा, जिससे क्षेत्रवार बन्दर पहचानने में बड़ी आसानी होगी, जो कि निरन्तर टीम की निगरानी में रहेंगे, टैटू लगाने के लिए उनकी इस टीम मे टैटू आर्टिस्ट भी शामिल हंै ।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष आगरा विकास प्राधिकरण मनीषा त्रिघाटिया, डीएफओ के0के0 सिंह, अपर आयुक्त प्रशासन पी0के0 अग्रवाल, अपर नगरायुक्त रामसिंह गौतम, आगरा विकास प्राधिकरण तथा वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
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