आगरालीक्स ..आगरा में फीस जमा ना होने पर 7 वीं की छात्रा का स्कूल से नाम काट दिया गया। इस मामले में अप्सा के सचिव डॉ गिरधर शर्मा का कहना है कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा सरकारी आदेश का पूरी तरह अनुपालन किया जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पूरी तरह सरकार के द्वारा सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा शासन के आदेश की खुली अवहेलना हो रही है।
केंद्रीय विद्यालय की कक्षा सात की छात्रा की फीस की रसीद साथ में संलग्न की गई है। इस बिटिया के पिता श्री हुकुम सिंह का देहांत 5 वर्ष पूर्व हो गया है और बिटिया के मौसा श्री राजीव पाराशर ( 8445269924)जो की प्राइवेट नौकरी करते है के द्वारा उसके अध्ययन का खर्च उठाया जा रहा है। लौकडाउन के कारण हुई परेशानी के चलते बच्ची की फीस समय पर जमा नहीं की गई। इस कारण बिटिया का नाम विद्यालय से काट दिया गया। अप्सा के अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने बिटिया की पारिवारिक स्थिति को देखते हुए कहा है कि बिटिया अगर चाहे तो केंद्रीय विद्यालय का उसका वर्ष भर का सारा शैक्षणिक खर्च वह वहन करने को तत्पर हैं या बिटिया चाहे तो उनके स्कूल प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल में निशुल्क पढ़ सकती है। बस का किराया, किताब, कॉपी आदि के लिए भी कोई धनराशि नहीं लेंगे l
अभिभावक अगर चाहें तो अपनी सुविधा अनुसार अपने बच्चों की फीस त्रैमासिक जमा न करके मासिक जमा कर सकते हैं।
- विद्यालयों द्वारा किसी भी प्रकार से अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा l
- और न ही किसी प्रकार का विलंब शुल्क लिया जाएगा।
- एडवांस महीनों की फीस नहीं माँगी जाएगी l
- किसी भी बच्चे की फीस जमा न होने पर नाम नहीं काटा जाएगा l
- किसी भी बच्चे की फीस जमा न होने पर ऑनलाइन क्लास से वंचित नहीं किया जाए l इस प्रकरण से कई सवाल खड़े होते हैं –
👉 शासन द्वारा जारी आदेश सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। पर इसे देखकर तो यही लगता है कि सरकारी एवं निजी स्कूलों में भेदभाव किया जा रहा है। आखिर क्यों??
👉इस संलग्न रसीद में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि सरकारी आदेश के वाबजूद केंद्रीय विद्यालय में मासिक नहीं बल्कि त्रैमासिक फीस ली जा रही है। जबकि निजी स्कूलों से मासिक शुल्क जमा करने के लिए कहा गया है। इस प्रकार की दोहरी नीति क्यों?
👉 बिटिया के परिजनों द्वारा फीस लेट जमा करने पर रु. 80/- विलम्ब शुल्क लिया गया l
👉 चूँकि 30 जून तक फीस नहीं जमा कराई और लिंक बंद हो गया, उसके पुनः प्रवेश का शुल्क रु. 100/- भी लिया गया ।
👉जुलाई में लिंक खुलने के बाद जब फीस जमा कराई तो एडवांस में जुलाई, अगस्त एवं सितम्बर की फीस जमा कराई l
उम्मीद है स्कूल प्रशासन बिटिया के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगा l
सरकारी स्कूलों में यह सब खुलेआम हो रहा है और प्राइवेट स्कूलों के लिए नियम अलग क्यों?