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रीढ़ रहत सब आत है

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आगरालीक्स…..
इंसान की रीढ़ भी गजब की चीज़ होती है। हो तो मुसीबत। न हो तो मुसीबत। कहते हैं कि रीढ़ के कारण इंसान तन कर सीधा खड़ा रहता है। पर बिना रीढ़ के वह जमीन पर रेंगने वाला कीड़ा बन जाता है। जहाँ रीढ़ इंसान की मजबूती, उसकी दृढ़ता और उसके स्वाभिमान का पैमाना होता है। वहीं बिना रीढ़ का इंसान चापलूसी, जी हूजूरी और मौका परस्ती का नायाब नमूना बन जाता है।
यूँ तो रीढ़ों के आकार, प्रकार और गुण दोष के बारे में चिकित्सा विज्ञान के शास्त्री लोगों ने अनेकों पुस्तकें लिखी हैं। पर रीढ़ इंसान के स्वभाव, व्यवहार और जीवन चरित्र को कितना और किस हद तक प्रभावित करता है, यह अभी भी गहन शोध का विषय बना हुआ है। काफी माथापच्ची के बावजूद भी दुनिया भर के तमाम वैज्ञानिक, चिकित्सक और समाजशास्त्री अभी भी इस रहस्य को ठीक से सुलझा नहीं पायें हैं। पर इतना जरूर तय हो चुका है कि आमतौर पर रीढ़ वाले इंसान तीन प्रकार के होते हैं। एक कमज़ोर रीढ़ वाले, दूसरे मजबूत रीढ़ वाले और तीसरे अति मजबूत रीढ़ वाले।
मजबूत रीढ़ वाले इंसान तार्किक, न्याय प्रिय और मानवीय होते हैं। कमज़ोर रीढ़ वाले इंसाफ, लॅाजिक और इंसानियत की बातें तो खूब करते हैं। इनके पक्ष में तलवारें भी खूब भाँजते-वाँजते रहते हैं। पर जैसे ही हवा का रुख उन्हें लाभप्रद लगता है। तो वे लपक कर फौरन ही बहती हुयी बयार के साथ बहने लगते हैं। और बिना रीढ़ वाले इंसानों के पाले में कूद कर, पूंछ सटका कर ज़मीन पर रेंगने के लिए तैयार हो जाते हैं। ऐसा वे मजबूत रीढ़ वालों की तरफ से मिली किसी घुड़की या चुनौती के कारण भी करते हैं।
अति मजबूत रीढ़ वाले इंसान दंभी, कुतर्की और अति महत्वाकांक्षी होते हैं। ये अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते। कभी भी किसी की कोई बात नहीं सुनते। अपनी मनमानी करते हैं। सबसे बड़ी बात यह कि ये मजबूत रीढ़ वालों को बिल्कुल पसंद नहीं करते। हमेशा बिना रीढ़ या कमज़ोर रीढ़ वालों का एक झुन्ड या अंध अनुयाइयों की एक समर्पित टुकड़ी बना कर मजबूत रीढ़ वालों को कब्जा में लेने और उनको हमेशा अपने हुजूर में सजदा करने के लिए मजबूर करते रहते हैं।
वे अपने आप को ईश्वर की ओर से भेजा हुआ दूत कहते हैं। अक्सर उसी तरह से व्यवहार भी करते हैं। कई बार तो अपने दंभ के आगे ये या इनके सजदे में झुके हुए बिना रीढ़ या कमज़ोर रीढ़ वाले इनके अंध भक्त इनको ईश्वर मानकर हर मजबूत रीढ़ वाले के ऊपर दबाव डालते हैं कि वे भी इनको भगवान ही मानें। और पूरे विश्व में घूम घूम कर यही प्रचारित करें। ताकि कुछ समय बाद अखिल विश्व के लोग भी यह मानने के लिये मजबूर हो जायें कि वे असल में भगवान न सही भगवान के रूप जरूर हैं। इसलिए हर इंसान का यह फर्ज बनता है कि वह हरवक्त उनकी स्तुति करता रहे। और पापियों के संहार में अपना यथोचित योगदान दे। नहीं तो, पाप के भागीदार बने और अपने संहार के लिए भी सदैव तैयार रहे।
अति मजबूत रीढ़ वाले हमेशा “मैं”,”मैंने”,”मेरा” और “मुझको” आदि शब्दों का प्रयोग खूब करते हैं। अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते। इनको ना बिल्कुल भी पसंद नहीं होता। अपनी हर बात पर हाँ करवाने के लिये ये हर सीमा को पार कर जाते हैं। और प्रायः तानाशाह बन जाते हैं। दुनिया भर के ज्ञानियों, विज्ञानियों और इतिहासकारों का मानना है कि तमाम तानाशाह भी अति मजबूत रीढ़ वाले शख्स थे। और इतिहास के हम सभी छात्रों को यह तो पता ही है कि विभिन्न देशों के इन तानाशाहों ने अपने-अपने समय में क्या क्या कारनामे किये थे? इसीलिये दुनिया उनसे आज भी नफरत करती है।
पर एक बात बड़े मार्के की यह होती है कि अति मजबूत रीढ़ वाले भले ही जी जान लगा कर मजबूत रीढ़ वालों को घुटनों के बल चलाने या हाँकने की कोशिशें करें, पर दरअस्ल वे खुद अन्दर ही अन्दर उनसे बहुत डरते हैं। औैर मजबूत रीढ़ वालों के साथ भारी जनसमर्थन और जन-सैलाब होने के कारण अक्सर उनके आगे झुकने और हार मानने के लिए मजबूर हो जाते हैं। महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, नेल्सन मंडेला और आन सूकी जैसे दृढ़ लोग देखने में भले ही कमजोर और दुबले पतले लगते हैं, पर वे हमेशा व्यवस्था परिवर्तन और क्रांति के जन नायक होते हैं। और अति मजबूत रीढ़ वाले तानाशाहों-शासकों पर अंततः अत्यंत भारी पड़ते हैं। मजबूत रीढ़ वाले इंसान देश पर शासन करें न करें, लोगों के दिलों-दिमाग पर हमेशा राज करते हैं। जो अति मजबूत रीढ़ वाले घमंडी-नकचढ़े चाह कर नहीं कर सकते।

—अरविन्द कुमार

tkarvind@yahoo.com

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