
तेज हो गई है । कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे को देशद्रोही बता रही हैं। इस
मुद्दे पर भाजपा का दोहरा चरित्र फिर उजागर हो गया है।
क्या भाजपा को यह याद नहीं है कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर में उसने जिस
पीडीपी के साथ सरकार बनाई। उस पीडीपी ने अफज़ल की फांसी पर उसे शहीद ही
करार नहीं दिया बल्कि भाजपा के साथ गठबंधन सरकार बनने के अगले ही रोज
पीडीपी विधायकों ने कहा कि अफ़ज़ल का शव मोदी सरकार उन्हें सौंप दे।
क्या भाजपा नेताओं ने पीडीपी का चुनाव घोषणापत्र नहीं पढा जिसमें
पाकिस्तान के कब्जे में जो कश्मीर है, हमेशा उसे पाक-शासित कहा। इतना ही
नहीं, घोषणापत्र में “सेल्फ रूल” ( संप्रभुता) का उल्लेख था; खासकर इन
मुद्दों पर कि जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल भारत के राष्ट्रपति द्वारा
मनोनीत प्रतिनिधि नहीं होगा, बल्कि चुनकर आया प्रतिनिधि होगा; राज की
अपनी न्यायपालिका होगी; न चुनाव आयोग वहां काम कर सकेगा, न वह सुप्रीम
कोर्ट के दायरे में आएगा; भारतीय प्रशासनिक सेवा भी वहां नहीं चलेगी। इन
राष्ट्रद्रोही संकल्पों को जपने वाली पार्टी के साथ भाजपा ने कंधे से
कन्धा मिला कर सरकार बनाई, चलाई।
पंजाब के शिरोमणि अकाली दल ने क्या किया था? अस्सी के दशक में जब
धर्म-युद्ध मोर्चा चल रहा था, खुद प्रकाश सिंह बादल ने दिल्ली आकर संसद
भवन के पास भारत के संविधान को फाड़ा और उसके पन्ने को सरेआम आग लग दी।
इन चीजों के दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं। वे लोग भी अपनी करतूतों से
इनकार नहीं करते। कन्हैया का कोई ‘राज-द्रोही’ बयान सामने नहीं है।
वह सलाखों के पीछे है।
योगेंद्र दुबे
संपादक
agraleaks.com
email- agraleaks@gmail.com
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