
मथुरा के नोहझील के प्राथमिक विद्यालय भगवान गढी में कार्यरत शिक्षक बेगराज के खिलाफ 84 हजार रुपये की हेराफेरी के आरोप लगे थे। इसकी शिकायत होने पर बीएसए कार्यालय में कार्यरत बाबू कुंज बिहारी ने शिक्षक बेगराज से 20 हजार रुपये मांगे, उन्होंने इसकी शिकायत अपनी एसोसिएशन यूटा से की। इसके बाद यूटा के सदस्यों ने विजिलेंस टीम से मुलाकात कर बाबू कुंज बिहारी द्वारा शिक्षकों से ली जा रही रिश्वत के बारे में जानकारी दी।
10 हजार रुपये देते ही दबोचा
प्लानिंग के तहत बेगराज ने बाबू कुंज बिहारी को मंगलवार को 10 हजार रुपये देने के लिए कहा था। वह दोपहर में बीएसए कार्यालय पहुंच गए, उनके साथ सादा ड्रेस में विजिलेंस की टीम भी थी। जैसे ही शिक्षक बेगराज ने बाबू कुंज बिहारी को 10 हजार रुपये दिए, विजिलेंस की टीम ने उन्हें पकड लिया। इससे विभाग में खलबली मच गई। बीएसए कार्यालय के बाबू आ गए। विजिलेंस टीम कुंज बिहारी को पकड कर थाने हाईवे ले आई और मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग में रिश्वत के बिना काम नहीं
शिक्षा विभाग में बिना रिश्वत के काम नहीं होता है। सबसे ज्यादा परेशान रिटायर शिक्षक हो रहे हैं। उनकी पेेंशन और फंड दिलवाने के लिए बीएसए और लेखा कार्यालय के बाबू खुलेआम रिश्वत ले रहे हैं। रिश्वत लेने के बाद भी शिक्षकों का काम नहीं किया जा रहा है। आगरा, मथुरा के साथ ही अन्य जिलों में भी यही हाल है, बाबू बेखौफ होकर शिक्षकों से रिश्वत ले रहे हैं। बीएसए कार्यालय आगरा में भी विजिलेंस की टीम छापा मार चुकी है। यहां भी शिक्षकों से मोटी रिश्वत ली जा रही है। इससे सरकारी शिक्षक परेशान है, लेकिन क्या करें, अधिकांश को इस तरह की कार्रवाई की जानकारी नहीं है। वैसे भी रिटायर होने के बाद उन्हें रुपयें की जरूरत होती है। इसलिए वे जल्द से जल्द पैसे लेना चाहते हैं।
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