
एक बडे मनोवैज्ञानिक सिग्मंड फ्राइड अपनी पत्नी के साथ पार्क में गए, वे आइसक्रीम लेने गए, उनकी पत्नी शॉपिंग करने लगी, इसी बीच उनका बेटा गायब हो गया। वे लौटकर आए तो उनकी पत्नी का रो रोकर बुरा हाल था, उन्होंने पूछा कि क्या हुआ, सिग्मंड की पत्नी ने बताया कि अभी अभी बेटा यहीं तो था पता नहीं कहां चला गया, पूरी मार्केट देख ली, लेकिन दिखाई नहीं दे रहा है। इस पर सग्मिंड ने अपनी पत्नी को शांत किया।
तुमने कहीं जाने के लिए मना तो नहीं किया
मनोवैज्ञानिक सिग्मंड फ्राइड ने अपनी पत्नी से सवाल किया कि तुमने बेटे से किसी जगह पर जाने के लिए मना तो नहीं किया था, इस पर उन्होंने कहा कि नहीं तो।, उन्होंने अपनी पत्नी की तरफ देखते हुए कहा कि जरा सोच कर बताओ।, यकायक ही वे बोली कि फाउंडेन पर जाने के लिए मना किया था। वे अपनी पत्नी के साथ मार्केट में बने फाउंटेन पर गए, वहां उनका बेटा खेल रहा था।
निगेटिव इमोशन से बच्चे बनते हैं क्रिएटिव
फाउंटेन पर बेटा मिलने के बाद मनोवैज्ञानिक सिग्मंड फ्राइड की पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने सवाल पूछा कि तुम्हे कैसे पता चला कि वह फाउंटेन पर होगा। इस सवाल पर मनोवैज्ञानिक सिग्मंड फ्राइड ने मनोवैज्ञानिक पहलू पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बच्चों से आप जिस काम की मना करेंगे, वे उस काम को करना चाहते हैं। यह बडी समस्या है, परिजन सोचते हैं कि बच्चा जिददी हो गया है और बात नहीं मानता है, जिस काम की मना करते हैं उसी काम को करता है। जबकि ऐसा नहीं है, बच्चे में निगेटिव इमोशन ज्यादा सक्रिय होते हैं। इन इमोशन का इस्तेमाल कर उसे क्रिएटिव बनाया जा सकता है।
जो काम करना हो, उसे करने से मना करें
मनोवैज्ञानिक नजर से देखें तो बच्चे से जो काम करना हो, उस काम को करने के लिए मना करें। बच्चे से कहें कि बेटा खाना नहीं खाना, इस पर बच्चा खाना खाने की जिद करेग, उससे कहें कि बेटा घर पर नहीं रहना, बाहर खेलने जाओ तो वह घर पर रहना पसंद करेगा। बच्चे से कहें कि बेटा पढाई ना करे, टीवी देखते रहा करो तो वह अपनी किताबें मांगने लगेगा।
इसी तरह agraleaks.com पर पैरेटिंग की टिप्स देखते रहिए
संपादक
योगेंद्र दुबे
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