
सवाल उठता है कि बच्चों को प्यार किया जाए या नहीं, उसे गलत करने पर डांट लगाई जाए, उसकी पिटाई की जाए।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे को प्यार और सादगी पूर्ण वातावरण में सही गाइडेंस मिलना चाहिए। यह कैसे हो सकता है। बच्चा किसी काम को बिगाड देता है, उसे डांटने के बजाय उसे समझें कि उसने ऐसा क्यों किया, इसके बाद उसे प्यार से समझाएं, बेटे आपने यह गलत किया, ऐसा नहीं करते हैं। जब आप खुद को बच्चे के बराबर रखकर गाइडेंस देंगे तो वह आपकी बात को अच्छी तरह समझेगा और अपनी गलती को स्वीकार कर भविष्य में गलती न करने के लिए खुद कहेगा।
बच्चा गलत काम से डरे, आपसे नहीं
जब आप बच्चे को डांटने लगेंगे तो वह आपसे तो डरेगा, लेकिन उसे गलत काम करने में डर नहीं लगेगा। इसलिए बच्चों का डांटने के बजाय सही गाइडेंस देना चाहिए। जिससे वह आपसे डरने के बजाय गलत काम करने से डरे।
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