आगरालीक्स…(शरद यादव) आगरा की फतेहाबाद सीट पर भाजपा ने छोटे से बड़ी उम्मीद लगाई है, लेकिन अब मुकाबला त्रिकोणात्मक मोड़ पर है.
आगरा के सर्द मौसम में चुनावी गर्मी प्रत्याशियों के पसीने छुड़ा रही है। मतदान का काउंट डाउन चालू है 06 दिन शेष हैं। फतेहाबाद सीट पर भाजपा ने छोटे से बड़ी उम्मीद लगाई है लेकिन जंग अब त्रिकोणात्मक मोड़ पर पहुंच गई है।
सेनापतियों ने संभाल लिया है मोर्चा
फतेहबाद को फतह करने के लिए भाजपा ने पिछले चुनाव के सूरमा जितेंद्र वर्मा को किनारे कर छोटेलाल वर्मा को सेनापति बनाया है। बसपा से शैलेंद्र प्रताप शैलू, कांग्रेस से होतम सिंह निषाद और सपा रालोद गठबंधन रूपाली दीक्षित मोर्चा संभाले हुए हैं।
भाजपा का कमल खिलाने वाले छोटे के बड़े दांव
निषाद बाहुल्य इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। भाजपा को सीट पर अपने परंपरागत वोटों के अलावा निषाद समाज से तीन बार मिले वोटों का भरोसा है। ठाकुर समाज के मतदाता भी भाजपा की ओर रुझान रखते हैं। सवर्ण समाज में पैंठ बनी हुई है।
भाजपा को विपक्ष के समीकरण ने चौंकाया
छोटेलाल ने भाजपा के लिए पहली बार इस सीट को फतह किया था और दो बार कमल को खिला चुके हैं एक बार बसपा को भी जीत का स्वाद चखाया है। हैट्रिक लगाने वाले सेनापति पर जीत का गणित है लेकिन इस बार बसपा और सपा-रालोद के गठबंधन के समीकरण ने भाजपा का गणित गड़बडा दिया है, जिससे जीत की राह इतनी आसान होने वाली नहीं है।

बसपा को भी आ रही है जीत की खुशबू
बसपा से शैलेंद्र प्रताप शैलू ताल ठोक रहे हैं। इस सीट पर बसपा के अपने दलित समाज के वोट तो हैं ही। साथ ही निषाद समाज के वोट इस बार कांग्रेस प्रत्याशी के निषाद होने से उसके पक्ष में कटने से बसपा को जीत की खुशबू आ रही है।
बसपा का सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला
साथ ही शैलेंद्र प्रताप के ठाकुर समाज से होने के कारण इस वोट को अपना मान रही है। जीत के आसार बने तो मुस्लिम वोट भी बसपा को फायदा पहुंचा सकते हैं। बसपा को इस सीट पर सोशल इंजीनियरिंग का फायदा मिलता नजर आ रहा है।
सपा-रालोद प्रत्याशी की हनक पड़ी भारी
सपा-रालोद गठबंधन ने इस सीट पर ऐन मौके पर प्रत्याशी को बदलकर दबंग गर्ल रूपाली दीक्षित को मैदान में उतारकर भाजपा औऱ बसपा के बने बनाए समीकरण को गड़बड़ा कर मुकाबले को त्रिकोँणात्मक संघर्ष में पहुंचा दिया है।
उच्च शिक्षित रूपाली को रसूखदार परिवार का फायदा
सपा-रालोद प्रत्याशी रूपाली दीक्षित उच्च शिक्षित हैं। साथ ही इस सीट पर रूपाली के परिवार का खासा रसूख है। सपा-रालोद गठबंधन को इस सीट पर निषाद समाज के वोटों का काफी भरोसा है क्योंकि सपा से अऩ्य सीटों पर निषादों को लुभाती रही है, जिसका उसे फायदा मिलने की उम्मीद है।
समाज की शान मान रहे हैं ब्राह्मण
रूपाली दीक्षित के ब्राह्मण समाज से होने के कारण एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में इस समाज का समर्थन मिलता नजर आ रहा है। जाट और मुस्लिम समाज के सहारे गठबंधन सर्द मौसम में भाजपा-बसपा के पसीने छुड़ा रहा है।
कांग्रेस के होतम काटेंगे निषाद वोटों को
कांग्रेस से इस सीट पर होतम सिंह निषाद मैदान में हैं लेकिन तीन दिग्गजों के बीच वह कितनी टक्कर दे पाएंगे इसका फैसला तो 10 फरवरी को होगा लेकिन कांग्रेस को होतम के निषाद होने पर समाज के वोटों का भरोसा है।
वोट कटने का नुकसान भाजपा को
वह कुछ वोट काटकर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही कांग्रेस अपने पुराने परंपरागत वोट के अलावा मुस्लिम वोटों पर भी निगाह है लेकिन कुल मिलाकर मुकाबले से अभी कोसों दूर हैं। कांग्रेस को आखिरी बार वर्ष 1985 में जीत अमिताभ लवानिया ने दिलाई थी।
फतेहाबाद फतह के पिछले पांच सूरमा
वर्ष 2017 जितेंद्र वर्मा भाजपा
वर्ष 2012 छोटे लाल वर्मा बसपा
वर्ष 2007 राजेंद्र सिंह भाजपा
वर्ष 2002 छोटेलाल वर्मा भाजपा
वर्ष 1996 विजयपाल सिंह जनता दल