आगरालीक्स…(News 23rd February 2022) दुनिया भर में गैस की किल्लत हो गई है। रूस और यूक्रेन के बीच तनाव और बढ़ा तो घरेलू एलपीजी गैस के रेट दोगुने हो सकते हैं, अप्रैल में एलपीजी के साथ सीएनजी और पीएनजी के रेट भी बढ़ सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर गैस की किल्लत हो गई है, इसका असर सभी देशों में देखने को मिल रहा है और गैस के रेट बढ़ने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यही हालात रहे तो अप्रैल 2022 तक भारत में एलपीजी गैस के रेट दोगुने हो सकते हैं। अभी गैस सिलेंडर करीब एक हजार रुपये का है डेढ़ महीने बाद दो हजार तक पहुंच सकता है।
आगरा में घरेलू एलपीजी गैस के आठ लाख उपभोक्ता
आल इंडिया इंडेन डिस्ट्रब्यूटर्स एसोसिएशन, आगरा संभाग के अध्यक्ष विपुल पुरोहित का कहना है कि अभी एलपीजी गैस की कोई किल्लत नहीं है। जो हालात हैं उन्हें देखते हुए मार्च तक कॉमर्शियल गैस के रेट बढ़ सकते हैं। आगरा में आठ लाख घरेलू एलपीजी के उपभोक्ता हैं।

भारत अपना रहा है तटस्थ रुख
भारत यूक्रेन संकट पर अभी तक तटस्थ रुख अपनाए हुए है लेकिन ज्यादा समय तक उससे दूर नहीं रह सकता। इस संबंध में अर्थशास्त्री एवं आगरा कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर शरदचंद्र भारद्वाज का कहना है कि यह दो महाशक्तियों की लड़ाई आर्थिक और एनर्जी वार है, जो तृतीय विश्व युद्ध के हालात भी पैदा कर सकती है।
यूरोपीय देशों में गैस की कीमतें 18 प्रतिशत तक बढ़ीं
रूस गैस पाइप लाइनों को बिछा रहा है। यूरोपियो देशों में गैस का सर्वाधिक प्रयोग होता है। ठंडे प्रदेशों के लिए तो गैस ही जीवन का आधार है। इस संकट के बाद यूरोपीय देशों में गैस की कीमतें भी 18 प्रतिशत तक बढ़ गई है और आने वाले समय में इसमें और इजाफा हो सकता है।
रूस-अमेरिका किसी को नाराज नहीं करना चाहता भारत
भारत पर यूक्रेन संकट के बारे में प्रोफेसर भारद्वाज का कहना है कि भारत इसमें तटस्थ भूमिका में है क्योंकि रूस उसका पुराना दोस्त है और संकट के समय साथ रहता है, जबकि बदली अर्थव्यस्था में अमेरिका से भी उसके संबंध बेहतर हुए हैं। चीन के साथ तनातनी है तो वह ऐसी हालत में दोनों में से किसी को नाराज नहीं करना चाहता है।
चुनाव बाद बढ़ सकते हैं पेट्रोल-गैस के दाम
इस संकट के कारण भारत की आर्थिक स्थिति और एनर्जी पावर पर इसका असर पड़ेगा, उनका मानना है कि युद्ध होने की स्थिति में चुनाव बाद देश में पेट्रोल और गैस के दामों में बढ़ोत्तरी के साथ आर्थिक स्थिति पर भी इसका खासा असर पड़ेगा।
यूक्रेन औऱ रूस के बीच तनातनी और बढ़ी
यूक्रेन पर रूस का हमला रोकने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास चल रहे हैं। रूस अपने सहयोगी देश बेलारूस के साथ यूक्रेन की सीमा पर युद्धाभ्यास भी कर रहा है। यूक्रेन की सीमा को तीनों ओर से रूसी सेना ने घेर रखा है, जहां करीब डेढ़ लाख से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। दोनों देशों की तनातनी के बीच यूक्रेन में धमाके भी हो रहे हैं। अमेरिका और नाटो देश रूस पर यूक्रेन पर हमला नहीं करने के लिए दबाव बना रहे हैं। लेकिन स्थिति में किसी तरह का अंतर नहीं पड़ा है।