आगरालीक्स…आगरा में महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या मीनोपॉज के मैनेजमेंट और आधुनिक दवाओं के जरिए लाइफ स्टाइल बेहतर बनाने पर हुई चर्चा…
एओजीएस और एएमएस की संयुक्त कार्यशाला
आगरा ऑब्सटेट्रिकल एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटी (एओजीएस) और आगरा मीनोपॉज सोसायटी (एएमएस) की ओर से एक कार्यशाला सोमवार शाम संजय प्लेस स्थित होटल पीएल पैलेस में आयोजित की गई। इसमें महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या मीनोपॉज के मैनेजमेंट और आधुनिक दवाओं के जरिए लाइफ स्टाइल को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।
ईज हर पॉज विषय पर व्याख्यान देते हुए मुख्य वक्ता एवं एओजीएस की अध्यक्ष डा. आरती मनोज गुप्ता ने कहा कि ४० की आयु के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं जिसका सीधा संबंध मीनोपॉज से है। यह एक ऐसा समय है जब माहवारी बंद हो जाती है। अगर १० से १२ महीने तक पीरियड्स नहीं आते हैं तो इसे मीनोपॉज कहा जाता है। यह ४५ से ५५ वर्ष की आयु में देखने को मिलता है। हालांकि वर्तमान समय में कई ऐसी दवाएं आ गई हैं जिनसे मीनोपॉज में होने वाली दिक्कतों को कम किया जा सकता है। यह दवाएं मीनोपॉज में होने वाली समस्याओं हड्डियों की कमजोरी, हड्डियों का टूटना, घबराहट, बेचैनी, यूरिनल डिस्ऑर्डर आदि को कम कर सकती हैं और महिलाओं के लाइफस्टाइल को बेहतर बना सकती हैं।

इस सत्र की अध्यक्षता डा. जयदीप मल्होत्रा, डा. अनुपम त्यागी और डा. सुषमा गुप्ता ने की। एएमएस की अध्यक्ष डा. रत्ना शर्मा ने बताया कि मीनोपॉज के लिए ५० के आस-पास की उम्र आंकी जाती है, लेकिन यह समस्या पहले या बाद में भी आ सकती है। एओजीएस कीं अध्यक्ष डा. सविता त्यागी ने बताया कि मीनोपॉज के बारे में जानकारी जुटाकर मानसिक तौर पर खुद को इस सिचुएशन को फेस करने के लिए तैयार किया जा सकता है। एएमएस कीं सचिव डा. निधि बंसल ने बताया कि बेचैनी रहना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, वजन बढऩा, बालों का झडऩा जैसे भी कई मीनोपॉज के लक्षण हैं, लेकिन आधुनिक दवाएं काफी राहत पहुंचा सकती हैं। पैनल डिस्कशन में डा. संध्या अग्रवाल, डा. सुधा बंसल, डा. अनुज शर्मा, डा. गार्गी गुप्ता, डा. शर्मीला पंजवानी आदि ने भी जानकारी दी। मध्यस्थता डा. नमिता शिरोमणि ने की।