
एसएन के हडडी रोग विभाग में 2009 से 2014 तक करीब 42 लाख के मेडिकल उपकरण खरीदे गए, ये उपकरण आॅपरेशन थिएटर के लिए खरीदे गए थे। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया से लेकर टेंडर खुलने में घोटाला किया गया। शासन स्तर से मेडिकल उपकरणों के लिए की गई टेंडर प्रक्रिया में तीन फर्मों द्वारा पूलिंग की गई, पूलिंग के चलते इन फर्मों को मेडिकल उपकरण की आपूर्ति करने के लिए कह दिया गया। इस प्रकरण की एक अन्य फर्म संचालक ने शासन और उसके बाद विजिलेंस टीम को शिकायत की। टीम ने प्रकरण की जांच की तो घोटाले की परतें खुलती चली गई।
फेक कंपनी से उपकरणों की दिखाई खरीद
विजिलेंस टीम की जांच में सामने आया कि जिन तीन फर्मों ने मेडिकल उपकरण खरीदरने के लिए मेडिकल उपकरण बनाने वाली फर्मों से अनुबंध दिखाया गया, वह फर्म एसएन में सप्लाई किए गए उपकरण ही नहीं बनाती थी। इसके बाद फर्मों के बारे में विजिलेंस की टीम ने जांच की तो घोटाला खुलता चला गया।
फर्म
विजिलेंस टीम द्वारा थाना एमएम गेट में दर्ज कराए गए मुकदमे में गौतम सेठ बाग फरजाना निवासी एक फर्म के संचालक हैं, दूसरी फर्म अनीता सेठ की है। जबकि तीसरी र्म मनीष गर्ग की है। इन तीनों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
फंसेंगे एसएन के अधिकारी
विजिलेंस जांच में सामने आया है कि मेडिकल उपकरणों की खरीद में एसएन के अधिकारी और बाबू भी शामिल थे। उनके खिलाफ भी सुबूत जुटाए जा रहे हैं।
प्राचार्य कार्यालय का तोडा शीशा
मंगलवार सुबह एसएन के प्राचार्य डॉ एसके गर्ग के कार्यालय के गेट के शीशे टूटे हुए थे, इससे एसएन के अधिकारी और कर्मचारियों में खलबली मच गई। इस मामले में थाना एमएम गेट में तहरीर दी गई है।
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