आगरालीक्स…आगरा के सूरसदन में हुआ ‘जाति ही पूछो साधु की’ नाटक का मंचन. कहानी एक ऐसे किरदार की है, जिसने शिक्षा को सामाजिक उत्थान का माध्यम माना…
आगरा में सामाजिक संस्था एसओएस व रंगलोक एकेडमी, नोएडा की ओर से विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित नाटक ‘जाति ही पूछो साधु की’ का मंचन सूरसदन प्रेक्षागृह में किया गया। प्रसिद्ध ईएनटी चिकित्सक स्व. डॉ मनोज चतुर्वेदी को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित इस नाटक के निर्देशक संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित रंगकर्मी व फ़िल्म कलाकार डिम्पी मिश्रा, सहायक निर्देशक गरिमा मिश्रा हैं। डिजाइन सारांश भट्ट ने किया है। नाटक समाज में फैले जातीय विद्वेष और इससे पनपी हिंसा को उभारता है। नायक महपति बभ्रुवाहन पढ़ लिखकर सम्भ्रांत समाज का हिस्सा बनना चाहता है, लेकिन जातीय संघर्ष में प्रेम और सपने की बलि चढ़ा बैठता है।

नाटक की लेखन शैली बर्तोल्त ब्रेख्त के नैरेटिव स्टोरी टेलिंग से प्रेरित है। इसमें सामाजिक व्यंग्य है। दूसरी बात जो इस नाटक को ब्रेख्तियन थियेटर से जोड़ती है वो ये कि नाटक हास्य व्यंग्य के रूप में लिखा गया है। क्योंकि ब्रेख्त का मानना था कि सामाजिक घटनाओं की विवेचना भावुक होकर की जाए तो तर्क का लोप हो जाता है। एसओएस के संस्थापक डॉ नवीन गुप्ता ने डॉ मनोज चतुर्वेदी के जीवन पर प्रकाश डाला। एसओएस द्वारा शहर के सात स्थानों पर ‘अब कोई भूखा नही सोएगा’ के उद्देश्य से चल रहे भोजनालयों को चलाने में डॉ मनोज चतुर्वेदी का बड़ा योगदान रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदुस्तान अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर ने डॉ मनोज चतुर्वेदी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान डॉ अरविंद जैन, राजीव सिंघल, मुकेश जैन, विकास खन्ना, डॉ अपूर्व चतुर्वेदी, डॉ अशोक विज, डॉ अनिल वर्मा आदि उपस्थित थे।