
मथुरा के जवाहर बाग से अवैध कब्जा मुक्त कराने पहुंचे पुलिस फोर्स पर दो जून को हमला बोल दिया था। इसमें एसपी सिटी मुकुद द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव शहीद हो गए। जवाहर बाग में लगी आग और पुलिस कार्रवाई में 29 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है, मरने वालों की संख्या कई अधिक बताई जा रही है। पुलिए अधिकारी मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव के मरने की भी पुष्टि कर रहे हैं। जवाहर बाग को खाली कराने के बाद यहां रह रहे लोगों को आस पास के जिलों की जेलों में भेजा गया है। बरेली के करीना गांव की रहने वाली धर्मवती 32 को एटा जेल में है, वह गर्भवती है और गुरुवार को एटा जेल में उसने एक बेटे को जन्म दिया। उसके दो बेटी और एक बेटा था, यह उसकी चौथी संतान हैं।
जवाहर बाग में अच्छा समय बीता, रामवृक्ष यादव रहेंगे जिंदा
बेटे को जन्म देने के बाद धर्मवती ने उसका नाम रामवृक्ष यादव रखा है। उनका कहना है कि वह जब गर्भवती थी, उस समय जवाहर बाग में रह रही थी। उनके साथ पति सीताराम 38 साल और बच्चे भी थे, यहां तक कि उन्होंने रामवृक्ष यादव को नहीं देखा है। लेकिन उनका कहना है कि गर्भावस्था के अंतिम महीने में उनका जवाहर बाग में अच्छा समय गुजरा, वे भारत सुभाष सेना की भी सदस्य नहीं हैं, इस बारे में उनके पति भी नहीं जानते हैं। मगर, वे जवाहर बाग की यादों को ताउम्र जिंदा रखना चाहती हैं। इसलिए बेटे का नाम रामवृक्ष यादव रखा है।
95 महिलाएं और 167 पुरुष जेल में
पुलिस ने जवाहर बाग क्लैश के बाद 151 की कार्रवाई करते हुए 95 महिलाएं और 167 पुरुषों को जेल भेजा है। इन्हें पहले मथुरा जेल में रखा गया था, इसके बाद इन्हें एटा भेज दिया गया।
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