आगरालीक्स…आगरा में डॉक्टरों ने बताया कितना खतरनाक हैं तंबाकू खाना. शांतिवेद इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस में हुई “विश्व तंबाकू निषेध दिवस” पर संगोष्ठी.
नेशनल मेडिको आर्गेनाइजेशन ने आयोजित की संगोष्ठी
नेशनल मेडिको आर्गेनाईजेशन आगरा द्वारा आज शांति वेद हॉस्पिटल में “विश्व तंबाकू निषेध दिवस” के उपलक्ष में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में नेशनल मेडिको फॉर्मेशन के राष्ट्रीय सलाहकार डॉ पवन गुप्ता, डॉक्टर संजय प्रकाश निदेशक-शांति वेद हॉस्पिटल,डॉ भूपेंद्र चाहर,सचिव, डॉ दिनेश राठौर संगठन सचिव, डॉ करण रावत, कोषाध्यक्ष डॉ अनूप दीक्षित, डा. दीप्ति माला, शांति वेद हॉस्पिटल के चिकित्सक एवं अन्य कर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डा. नरेंद्र पालीवाल बडोदरा रहे। डा. पालीवाल ने उनके द्वारा गुजरात के भावनगर मेडिकल कॉलेज बडोदरा मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में “टोबैको फ्री केंपस” का सफलतापूर्वक अभियान चलाया। इसके तर्ज पर आज देश के विभिन्न कार्यालयों में “टूबैको फ्री परिसर” घोषित किए जा रहे हैं।

उन्होंने तंबाकू से होने वाली हानि एवं उनके निदान के उपाय सुझाए। कार्यक्रम का शुभारंभ चिकित्सक बंधुओं ने दीप प्रज्वलन एवं एन.एम.ओ. मंत्र के साथ हुआ। कार्यक्रम के स्वागत उद्बोधन में डॉ. संजय प्रकाश द्वारा तंबाकू से होने वाले विभिन्न आर्थिक पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के दुष्प्रभाव पर प्रकाश डाला। नवनीत अग्रवाल, कैंसर रोग विशेषज्ञ द्वारा अवगत कराया गया के समस्त प्रकार के कैंसर ओं में तंबाकू जनित कैंसर से होने वाली मृत्यु लगभग 50% होती है जो बहुत गंभीर है। डॉ भूपेंद्र चाहर ने अपने उद्बोधन में बताया कि जिला अस्पताल में तंबाकू जनित कैंसर के गरीब रोगियों के लिए औषधियां मुफ्त उपलब्ध हैं। तंबाकू के द्वारा मुंह, गले, फेफड़े आदि के कैंसर होते हैं। तंबाकू सेवन करते हैं तमाकू रक्त के द्वारा शरीर के हर हिस्से में जाते हैं और श्वास तंत्र के अतिरिक्त शरीर के अन्य तंत्रों में। इसकी वजह से कैंसर के संभावनाएं बढ़ती हैं।
डॉ दिनेश राठौर के द्वारा बताया गया के तंबाकू का सेवन एक आदत नहीं मानसिक रोग है लंबे समय तक तमाकू लेने के बाद मस्तिष्क में बदलाव आते हैं, जिसके कारण तमाकू लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। जब उसको तमाकू नहीं मिलती तो बेचैनी, तनाव,गुस्सा बढ़ जाता है। इन तकलीफों से बचने के लिए व्यक्ति को मजबूरन तमाकू लेनी पड़ती है ।इस कारण जब वे बार-बार छोड़ने का प्रयास करता है तो उस में कठिनाई आती है ।इसके उपचार के लिए रोगी की काउंसलिंग एवं औषधि के द्वारा निदान किया जाता है। डॉ पवन गुप्ता ने बताया कि तंबाकू सेवन करने वाले व्यक्ति ही नहीं उसके पूरे परिवार एवं समाज में पड़ता है । सरकार के द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम चलाकर जन सामान्य को नशामुक्ति का संदेश दिया जाता है, जिससे लोग संदेश को गंभीरता से लें और तंबाकू छोड़ें। कार्यक्रम का संचालन डॉ भूपेंद्र चाहर के द्वारा किया गया । कार्यक्रम का समापन डॉक्टर संजय प्रकाश निदेशक शांति वेद हॉस्पिटल के तन्ना धन्यवाद प्रस्ताव के द्वार के साथ हुआ।