
पॉश कॉलोनी भरतपुर हाउस में 20 जून की दोपहर 12:30 बजे जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी की कोठी में गोलीकांड हुआ था। कुल चार गोलियां चली थीं। दो गोलियां संजीव की पीठ में लगी थीं। एक गोली राजकुमार के सिर में। एक गोली कहीं और जाकर लगी। पुलिस मान रही है कि संजीव की पीठ में गोली राजकुमार ने मारी।
उनके पास ही उनका लाइसेंसी रिवाल्वर पड़ा मिला था। लेकिन यह साफ नहीं हो पा रहा है कि राजकुमार को गोली कैसे लगी? उन्हें संजीव ने घायल होने के बाद उनका रिवाल्वर छीनकर गोली मारी? या उनके पास अपना रिवाल्वर था, जिससे फायर किया। या फिर राजकुमार ने खुद को गोली मार ली। मौके पर सबसे पहले कोठी के बाहर खड़ा संजीव का ड्राइवर रवि शर्मा पहुंचा था। पुलिस उससे तीन दिन से पूछताछ कर रही है।
पुलिस के मुताबिक वह जब कोठी के गेट पर पहुंचा तो संजीव घायल पड़े थे, वह उन्हें डाक्टर के पास ले गया। संजीव से भी पूछताछ हो चुकी है। वह कह रहे हैं कि उन्हें गोली राजकुमार ने मारी। इसके बाद उन्हें कुछ पता नहीं। राजकुमार के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी तस्वीर साफ नहीं हो पाई। इसमें ब्लैकनिंग या टेटोइंग नहीं आई, मतलब गोली लगने और निकलने की जगह पर जलने या झुलसने के निशान नहीं थे। पुलिस ने बताया कि इसका अर्थ यह होता है कि गोली कुछ दूरी से मारी गई। लेकिन इस रिपोर्ट पर भरोसा इसलिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि गोली लगने और निकलने के निशान पर टांके लगे थे। मरहम भी लगाया गया था। इसके चलते निशान स्पष्ट नहीं था।
डिब्बा कारोबार से लग्जरी जिंदगी जी रहा गागा
पुलिस जांच में सामने आया है कि 10 साल पहले गागा का भाई खटीकपाडा के लोगों की लोटरी का पैसा लेकर फरार हो गया था। मामला रफादफा होने के बाद गागा ने डिब्बा कारोबार शुरू किया। इसके लिए पहले टेलीफोन एक्सचेंज लगाया, एमसीक्स के बडे कारोबारी से गुर सीखे, इसके बाद खुद ही डिब्बा कारोबार करने लगा। अब वह आॅडी और मर्सडीज से चलता है, विदेश यात्रा आम है और आगरा के होटलों में पार्टी देता है।
पीडित कारोबारी आने लगे सामने
गागा और डिब्बा कारोबार के पीडित कारोबारी सामने आने लगे हैं। गागा और उसके गुर्गे बडे कारोबारियों को जाल में फंसाते थे। उन्हें गागा की पार्टी में ले जाते थे, वहां विदेशी बालाखों के ठुमकों के बीच दारू पार्टी कराते थे। इसके बाद डिब्बा कारोबार में चंद मिनटों में लाखों से करोडों रुपये की जीत का नजारा दिखाते थे। कारोबारियों से कहा जाता था कि एक बार पैसा लगाओ जीत तुम्मारी और हार हमारी। कारोबारी के जाल में फंसने पर पहले कुछ महीनो उसे कमाई कराई जाती थी, इसके बाद वह कुछ ही दिनों में हार के बाद करोडों का कर्जदार बन जाता था। उस पर एक ही विकल्प रहता था कि अपनी प्रोपर्टी बेचे और गागा भाई के इशारों पर नाचे।
हत्याकांड की साजिश में शामिल गागा
गोलीकांड में सीधे तौर पर उसकी भूमिका नहीं बताई गई है लेकिन उस पर साजिश में शामिल होने का शक जाहिर किया गया है। उसका नाम राजकुमार लालवानी की हत्या की एफआईआर में भी है।
यह उठ रहे हैं सवाल
– संजीव ने कालोनी में एंट्री गागा भाई के नाम से क्यों करवाई ?
– संजीव के हाथ में कागजात थे वे कहां हैं, राजकुमार के घर से गायब उनका मोबाइल भी नहीं मिला है।
– राजकुमार की पत्नी निर्मला गहरे सदमे में हैं, अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है।
– कालोनी के कई लोगों का बयान अलग है, उनका कहना है कि दो-दो गोलियों की आवाज के बीच एक मिनट का अंतराल रहा।
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