
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नौवीं कक्षा में दो छात्र थे, उनसे डीआईओएस दिनेश यादव ने सवाल पूछना शुरू किया, पहला सवाल पूछा प्रदेश के मुख्यमंत्री कौन है, छात्र इसका जवाब नहीं दे सके। इसके बाद दूसरा सवाल पूछा प्रदेश का नाम क्या है, इस सवाल का भी छात्रों पर कोई जवाब नहीं था। कई बार पूछने के बाद भी वे प्रदेश का नाम तक नहीं बता सके। इसके बाद उनसे पूछा कि जिस प्रदेश में रह रहे हो उसकी राजधानी क्या है, छात्र जब प्रदेश और मुख्यमंत्री का नाम नहीं जानते हैं तो इस सवाल का जवाब कहां से देते। इसके बाद भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में छात्रों के 80 फीसद से अधिक अंक आ रहे हैं।
(इंटरनेट फोटो)
कॉमर्स की स्पेलिंग नहीं जानते, ना सुना सके पहाडा
इस पर डीआईओएस ने विषय से संबंधित सवाल पूछना शुरू किया, उनसे कहा कि कॉमर्स पढते हो, छात्रों ने जवाब दिया कि हां, उन्होंने पूछा कि कॉमर्स की स्पेलिंग बताओ, लेकिन छात्रों के पास इस सवाल का जवाब भी नहीं था। इसके बाद उन्होंने छात्रों से 19 का पहाडा सुनाने के लिए कहा, वे पहाडा भी नहीं सुना सके।
सवालों का नहीं मिला जवाब, क्या करते लौट आए
एक के बाद एक सवाल का जवाब न मिलने पर डीआईओएस का सब्र जवाब दे गया, उन्होंने प्रिंसिपल से पूछताछ की, उनसे पूछा कि क्या स्कूल में पढाई नहीं होती है। शिक्षक आते भी हैं कि नहीं, इस तरह डीआईओएस को वापस लौटना पडा।
डॉ मुरली मनोहर जोशी ने भी उठाया शिक्षा पर सवाल
इससे पहले विवि के छलेसर परिसर में आयोजित समारोह में शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी ने यूपी और बिहार की शिक्षा पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि आगरा के अंबेडकर विवि में मूल्यांकन करने आए अर्थशास्त्र के शिक्षक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ के बारे में नहीं जानते हैं और बिहार की टॉपर अपने विषय के बारे में सही नहीं बता सकी तो जेल जाना पडा। यह स्तर से यूपी और बिहार की शिक्षाा का, इसके बारे में सोचना होगा।
Leave a comment