
(इंटरनेट फोटो )
आगरा के खंदारी में मैरिज का कार्यालय है। आॅनलाइन मैरिज के लिए युवकों द्वारा आवेदन किया जाता था, कुछ लोग कार्यालय पर आकर भी आवेदन करते थे। उनकी प्रोफाइल के हिसाब से युवतियों के फोटो दिखाए जाते थे, इसके बाद बैंक एकाउंट में 3500 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराई जाती थी। युवकों को जाल में फंसाने के लिए उनकी युवतियों से मोबाइल पर बात कराने के लिए पैसे वसूले जाते थे। युवतियों का व्हाटस एप नंबर दिया जाता था, इस पर वे चैटिंग कर सकते थे, लेकिन इसके लिए अलग से पैेसे देने होते थे। वहीं, युवती जब चाहे उन्हें ब्लॉक कर सकती थी।
एक ही युवती कई युवकों से करती थी बात
रैकेट के पास तीन चार युवतियां थी, इसके अलावा वेबसाइट पर फेक फोटो डाल रखे थे। युवकों से इन्हीं तीन चार युवतियों से बात कराई जाती थी, इसके बाद वे व्हाटस एप पर चैटिंग करने लगते। कुछ दिन बाद नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था, इस तरह युवकों से 10 से 20 हजार की ठगी की जा रही थी।
महिला इंजीनियर चला रही वेबसाइट, चार हिरासत में
इंस्पेक्टर राजा सिंह ने बताया कि खंदारी से बैस निवासी रायपुर, राजकुमार निवासी राजकुमार, अमित निवासी बिलायीगढ ये तीनों छत्तीसगढ के हैं के साथ प्रदीप द्विवेदी निवासी मध्य प्रदेश को पकडा है। इनके पूछताछ में पता चला कि ये लोग आगरा में पिछले दो साल से ठगी कर रहे थे। तीन चार युवतियों को भी ठगा है। बाकी सभी युवक हैं। साइट पर जो बैंक एकाउंट नंबर दिए हैं, वे सभी फर्जी हैं। एक ही युवती की अलग अलग पोजीशन में प्रोफाइल पिक्चर लगाते थे। इनमें से पांच युवतियां गैंग में शामिल हैं।
इनके अलावा कई फोटो इंटरनेट के जरिए ले रखे थे। आवेदक का फोन नंबर लिया जाता था। वह जिस युवती को पसंद करता, उससे बात कराने का वादा किया जाता। इसकेबाद गैंग की वही युवती बनकर गैंग की महिला सदस्य फोन करती। उसे झांसे में लेकर एकाउंट में चार हजार जमा कराए जाते। यह वेबसाइट छत्तीसगढ की महिला इंजीनियर चला रही थी।
ऐसे खुला खेल
बदायूं के रिटायर्ड कांस्टेबल रामचरण ने आगरा में माई पार्टनर डॉट कॉम द्वारा फ्रॉड किए जाने की शिकायत की थी, इस पर पुलिस ने साइबर सेल ने गिरोह को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। एक सिपाही ने कुंवारा बनकर आवेदन किया। फोन पर बातें की। इसके बाद पूरी डिटेल हासिल कर दी। और फिर हरीपर्वत पुलिस को साथ लेकर छापा मार दिया।
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