
आगरालीक्स.. उन्नत और सम्वृद्ध भारत का सपना लघु उद्यमियों के विकास के बिना सम्भव नहीं है। अजुर्नराम मेघवाल (वित्त एवं कॉरपोरेट राज्यमंत्री, भारत सरकार) ने यह बात होटल मधु स्री में आयोजित लघु उद्यमि महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जीएसटी (गुड सर्विस टैक्स) का विरोध सिर्फ क्रेडिट के चक्कर में कर रही है। जबकि भाजपा कांग्रेस का हर सकारात्मक सुझाव मानने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने पर भारत की जीडीपी दर दो अंको में (7.6 से बढ़कर 10 से अधिक) हो जाएगी। कांग्रेस चाहती है कि जीएसटी की जो दर तय हो रहीं हो वह संविधान में शामिल की जाएं। यदि इन दरों को संविधान में शामिल किया गया तो भविष्य में दरों को बदलने में परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी आने पर व्यापारी टैक्स के मकड़जाल से मुक्त हो जाएंगे।
नेता नीयत और निति की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे नेता (नरेन्द्र मोदी) और नीयत ठीक हैं। नीतियों में जो कुछ कमिया हैं उन्हें हम सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। विशिष्ट अतिथि सांसद रामसंकर कठेरिया ने कहा कि बड़े 100 लोगों के विकास से नहीं बल्कि देश के कौने-कौने में मौजूद लघु उद्यमियों के विकास से देश की तरक्की होगी। कार्यक्रम के अध्यक्ष पूरन डावर ने इस मौके पर मांग रखी कि मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बैंकिंग की लग व्यवस्था होनी चाहिए। भारत में 10-14 प्रतिशत स्किल डवलपमेंट कागजों में हो रहा है। उन्होंने शिक्षा नीति को इंडस्ट्री से जोड़ने की बात कही। प्रदेश अध्यक्ष राकेश गर्ग ने लघु उद्योग भारती का परिचय देते हुए कहा कि लघु उद्योग किसी भी देश की रीड़ की हड्डी है।
संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल व मनीष अग्रवाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन जितेन्द्र गुप्ता ने दिया। इस मौके पर मुख्य रूप से संगठन मंत्री प्रकाश जी, कार्यक्रम संयोजक राजीव बंसल जिलाध्यक्ष अनुज सिंघल, जिलाउपाध्यक्ष मनीष गर्ग, जिलामहासचिव विजय गुप्ता, जिला सचिव अंशुल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष जतिन अग्रवाल, पूर्व महानगर अध्यक्ष महेन्द्र नरूला, पीपी सिंह व मधुसूदन भट्ट आदि मौजूद थे। वीरेन्द्र गुता व दीपेन्द्र मोहन ने जीएसटी को लेकर मंत्री जी को त्रापन सौंपा।
जीएसटी में इन बिन्दुओं को सुधारने की मांग
1-टैक्स क्रेडिट तब मिलेगा, जब सप्लायर टैक्स पे कर देगा। यदि सप्लायर टैक्स पे नहीं करता तो इसका खामियाजा उद्यमी क्यों भुगते ?
2-जीएसटी में दो टैक्स होंगे। सीजीएसटी व एसजीएसटी। इसमें दो विभाग होंगे। एक ही ट्रांजक्शन के लिए दो विभाग में असिस्मेंट कराना होगा। इससे उद्यमियों की परेशानी बढ़ेगी।
3-बैनेफिट बढ़ने की समयावधि एक वर्ष से अधिक होकर बढ़नी चाहिए।
4-जीएसटी ऑफिसर किसी भी व्यापारी का ऑडिट कर सकता है। छोटे व्यापारी को इस नियम से बाहर रखना चाहिए।
5-स्टॉक ट्रांसफर पर भी जीएसटी में टैक्स है। यह लगत नियम है।
बिजनेस एक्सीलेंस अवार्ड से ये उद्यमी होंगे सम्ममानित
-पूरन डावरः डावर शूज
-संजीव मित्तलः अतुल जनरेटर
-किशोर कन्नाः रॉमसन्स
-सुभाष चंद्र गोयल, अमित गोयलः पंछी पेठा
-अशोक जैनः डॉक्टर सोप
-विकास मित्तलः जलेसर घंटेवाले
-संतोष कुमार अग्रवालः पूजा ग्लास, फिरोजाबाद
-ठाकुर अनूप सिंहः मेग कोम्प्यूसोफ्ट, लखनऊ
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