
(ब्रज खंडेलवाल जी के फेसबुक पोस्ट से लिया गया फोटो)
बारिश के बाद से हथिनीकुंड से छोडे जा रहे जल से आगरा और मथुरा में सूखी यमुना में जलराशि बढने लगी है। सोमवार को यमुना व्यू प्वाइंट पर यमुना भर कर चल रही थी, इसके बाद जैसे जैसे जल बढेगा यमुना खतरे के निशाने की तरफ बढने लगेगी। इसे देख अभी से यमुना किनारे रह रहे लोग परेशान हैं। वहीं, जिस तरह से जुलाई में रिकॉर्ड 600 एमएम से अधिक बारिश हुई है, इससे यमुना का जल स्तर बाढ के निशान तक पहुंचने की आशंका बढ गई है।
495 फीट के बाद खतरा
यमुना में खतरे का निशान 495 फीट है, इस निशान तक यमुना का जल स्तर पहुंचने पर नाले बैक मारने लगेंगे और जैसे जैसे जल बढने बाढ आ जाएगी, सबसे पहले यमुना किनारे बनी कॉलोनी में बाढ का पानी पहुंचेगा, इसके बाद वह बढता जाएगा।
2010 में बिगडे थे हालत, 1978 में आई थी बाढ
आगरा में 2010 में यमुना का जल स्तर 494 5 फीट तक पहुंच गया था। इससे दयालबाग क्षेत्र की कई कॉलोनी में बाढ का पानी आ गया था, लोगों को अपने घर खाली करने पडे थे। कई घरों में दरारें पड गई थी। इसके साथ ही बल्केश्वर और जीवनीमंडी क्षेत्र में यमुना किनारे बनी कॉलोनियों में भी बाढ का पानी आने का खतरा बढ गया था। जबकि आगरा में 1978 में बाढ आई थी, उस समय जीवनीमंडी पानी में डूब गई थी, कई दिनों तक बाढ का पानी रहा था। इसके बाद 1995 में यमुना का जल स्तर खतरे के निशान तक पहुंचा था।
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