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Look in to the future Conference in Agra: Stem cells can cure many incurable diseases…#agranews

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आगरालीक्स…स्टेम सेल से मुमकिन है कई लाइलाज रोगों का इलाज. इनमें महिलाओं के कई कैंसर भी शामिल. आगरा में इनसर्ग के लुक इन टू द फ्यूचर सम्मेलन में की गई उन रोगों के इलाज पर चर्चा जिनके इलाज में मौजूद व्यवस्था है नाकाम…

स्टेम सेल से मुमकिन है लाइलाज रोगों का इलाज
आगरा में आयोजित इंडियन सोसायटी आॅफ एस्थेटिक एंड रीजनरेटिव मेडिसिन (इनसर्ग) के लुक इन टू द फ्यूचर सम्मेलन में उन रोगों के इलाज पर चर्चा हुई, जिनके इलाज में मौजूद व्यवस्था नाकाम हो रही है। विशेषज्ञों ने कहा कि स्टेम सेल थैरेपी निराशा में आशा की तरह है। इससे निकट भविष्य में कई तरह की लाइलाज बीमारियों का इलाज हो सकेगा, जिसमें महिलाओं के कई कैंसर भी शामिल हैं। मुंबई के टाटा मैमोरियल सेंटर से आए डाॅ. गौरव नरूला ने बताया कि स्टेम सेल थैरेपी मेडिसिन क्षेत्र में एक तेजी से विस्तार करने वाली शाखा है, क्योंकि हम गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए उन्हें चुनिंदा रूप से संशोधित, विस्तारित और पुनव्र्यवस्थित करना सीखते हैं, जिन्हें अब तक लाइलाज माना जाता था या नाउम्मीदी के साथ इलाज किया जाता था। इसमें आनुवांशिक रूप से संशोधित टी सेल्स का उपयोग कैंसर को लक्षित करने के लिए किया जा सकता है। मुंबई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और टाटा मैमोरियल के एक संयुक्त शोध की मानें तो सेल ल्यूकेमिया और लिम्फोमास पर निर्देशित एक स्वेदशी रूप से विकसित सीएआर टी सेल उत्पाद अब टीएमसी में नैदानिक परीक्षणों से गुजर रहा है। इससे कई और सेल थैरेपी विकसित करने का रास्ता खुल गया है। चिकित्सा के इस तेजी से घूमते और रोमांचित क्षेत्र में अगला कदम उठाने के लिए अब हमारे पास बुनियादी ढांचा, क्षमता, तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञों का समूह है। कई अन्य केंद्र भी विभिन्न रूपों में सेल और जीन थैरेपी का अनुसरण कर रहे हैं, हम इसे तेजी से भारत में उपचार का हिस्सा बनाने के लिए तैयार हैं।

महात्मा गांधी मेडिकल काॅलेज एंड हाॅस्पिटल, जयपुर में मेडिकल ओंकोलाॅजी विभाग के अध्यक्ष डाॅ. हेमंत मल्होत्रा ने बताया कि 10 से 15 फीसद तक कैंसर जेनेटिक हो सकते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के लिए यह रिस्क 50 से 80 जबकि ओवेरियन कैंसर के लिए यह रिस्क 30 से 40 फीसद तक हो सकता है। इसके लिए ब्रेका वन, ब्रेका टू जांचें कराई जाती हैं। म्यूटेशन मिलने पर परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच कराई जाती है ताकि इसकी आनुवांशिकता का पता लग सके। परिवारीजनों को काउंसलिंग के लिए तैयार किया जाता है। हाॅलीवुड सेलिब्रिटी एंजेलिना जाॅली के केस में भी यही हुआ था। उन्हें जब कैंसर की आनुवांशिक मौजूदगी का पता लगा तो उन्होंने बिना किसी बीमारी के ही अपने दोनों ब्रेस्ट रिमूव करा दिए, बाद में इन्हें री कंस्ट्रक्ट कराया।
यूएई कीं डाॅ. रूबी रूपराय ने बताया कि रेडियोफ्रीक्वेंसी और लेजर तकनीकों का उपयोग करने वाली एनर्जी डिवाइसिज ने वजाइना संबंधी कई रोगों, यूरिनरी स्ट्रेस आदि को दूर करने में काफी मदद की है। यह तकनीकें और भी तेजी से बढ़ रही हैं। यह एक तरह से एनर्जी आधारित उपचार, नाॅन सर्जिकल प्रक्रियाएं हैं जिसमें हीट का उपयोग किया जाता है। कोलेजन, रक्त वाहिकाओं, टाइटनेस और ल्यूब्रिकेशन को बढ़ाना होता है। केगेल और पेल्विक एक्सरसाइज से वजाइना की मांसपेशियों को मजबूत किया जा सकता है। डाॅ. सवाना चैंगथम ने महिलाओं के संपूर्ण सौंदर्य, कायाकल्प और निजी रोगों के समाधान पर विस्तार से जानकारी दी। डाॅ. प्रभु मिश्रा ने पीआरपी और स्टेम सेल आधारित उपचार विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि पुनर्योजी चिकित्सा में इस पद्धति को बहुत आशा से देखा जा सकता है। यह गंभीर चोटों या पुरानी बीमारियों, उतकों या अंगों के पुनः काम करने लायक बनाने का एक तरीका है। क्षतिग्रस्त उतकों की मरम्मत और पुनस्र्थापना की जा सकती है। आगरा कीं डाॅ. परिणीता बंसल ने काॅस्मेटिक गायनेकोलाॅजी के बारे में विस्तार से बताया।
आयोजन अध्यक्ष व उजाला सिग्नस रेनबो हाॅस्पिटल के डायरेक्टर डाॅ. नरेंद्र मल्होत्रा, डाॅ. जयदीप मल्होत्रा, इनसर्ग कीं अध्यक्ष निर्वाचित डाॅ. रागिनी अग्रवाल, उपाध्यक्ष डाॅ. लीला व्यास, सचिव डाॅ. प्रीति जिंदल, डाॅ. मिलिंद शाह, डाॅ. तनुजा उचिल, आयोजन समिति के डाॅ. अनुपम गुप्ता, डाॅ. नीहारिका मल्होत्रा, डाॅ. मंदानिकी प्रधान, डाॅ. जेबी शर्मा आदि मौजूद थे।

शर्म और झिझक छोड़ें, बात करें
सोसायटी कीं उपाध्यक्ष व उजाला सिग्नस रेनबो हाॅस्पिटल कीं निदेशक डा. जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि कि महिलाओं की लडाई पहले खुद से है। उन्हें शर्म और झिझक त्यागनी होगी, क्योंकि उन्हें स्वस्थ रहना है। न सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने परिवार, अपने बच्चों के लिए भी। देखा गया है कि अक्सर महिलाएं जब अपने गायनेकोलाॅजिस्ट के पास जाती हैं तो काफी सवालों के जवाब झिझक कर गलत देती हैं। भले ही आप उनसे बातें छुपाती हैं, लेकिन आपको बता दें कि आपके डाॅक्टर को सबकुछ पता है।

आधुनिक इलाज मौजूद है पर पता नहीं
सोसायटी के अध्यक्ष व उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के निदेशक डाॅ. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि ऐसे रोगों से निपटने के लिए तकनीक काफी आगे बढ़ गई है। इलाज मौजूद है लेकिन लोगों को पता नहीं है, क्योंकि वे इस बारे में बात ही नहीं करते। ऐसी ही एक तकनीक है फैमिलिफट लेजर सिस्टम, जिससे तीन या चार सिटिंग में इनमें से कई रोगों को खत्म किया जा सकता है। कोई सर्जरी नहीं, कोई डाउनटाइम नहीं, कोई दवा नहीं, कोई दर्द नहीं। उत्तर भारत में आगरा के उजाला सिग्नस रेनबो हाॅस्पिटल में फिलहाल यह तकनीक उपलब्ध है। यह कोई सर्जिकल प्रोसेज नहीं है और कई मामलों में 95 प्रतिशत तक सफलता दर दर्ज की गई है। यूं कहें कि महिलाओं की गुप्त समस्याओं का निवारण अब लेजर उपचार द्वारा संभव है।

यह हुई कार्यशालाएं
वहीं सम्मेलन के आखिरी दिन कई कार्यशालाएं और लाइव प्रस्तुतीकरण हुए। डाॅ. रत्ना डी पुरी, डाॅ. वैनी थापर, डाॅ. अश्विनी काले के निर्देशन में जेनेटिक टेस्ट और केस डिस्कशन पर खुली चर्चा हुई। डाॅ. नीहारिका मल्होत्रा, डाॅ. मंजीत मेहता, डाॅ. आराधना द्विवेदी, डाॅ. सरिता दीक्षित, डाॅ. अश्विनी मोहनदास, डाॅ. अनुश्री पांडे, डाॅ. सोनाली गुप्ता, डाॅ. अनुपम गुप्ता, बाॅलीवुड फेम ब्यूटीशियन नीलम गुलाटी, डाॅ. देबाशीष सरकार, डाॅ. मनिंदर आहूजा, डाॅ. रश्मि चाहर, आदि ने वर्कशाॅप और लाइव डेमोस्ट्रेशन किए।

Written by
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