
गणेश चतुर्थी के दिन (5 से 15 सितंबर) भगवान गणपति की मूर्ति स्थापना की जाती है और निर्गुण निराकार भगवान गणेश काे देवलोक से भूलोक की इस मूर्ति में सगुण साकार रूप में स्थापित होने हेतु विभिन्न प्रकार की पूजा-अर्चना, आराधना, पाठ करते हुए आह्वान किया जाता है और ये माना जाता है भगवान गणपति गणेश चतुर्थी से अनन्त चतुर्दशी तक सगुण साकार रूप में इसी मूर्ति में स्थापित रहते हैं, जिसे गणपति उत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणपति उत्सव के दौरान लोग अपनी जिस किसी भी इच्छा की पूर्ति करवाना चाहते हैं, वे अपनी इच्छाऐं, भगवान गणपति के कानों में कह देते हैं।
यह भी है मान्यता
एक और मान्यता है कि श्री वेद व्यास जी ने महाभारत की कथा भगवान गणेश जी को गणेश चतुर्थी से लेकर अनन्त चतुर्थी तक लगातार 10 दिन तक सुनाई थी। यह कथा जब वेद व्यास जी सुना रहे थे तब उन्होंने अपनी आखें बन्द कर रखी थी, इसलिए उन्हें पता ही नहीं चला कि कथा सुनने का गणेशजी पर क्या प्रभाव पड रहा है। जब वेद व्यास जी ने कथा पूरी कर अपनी आंखें खोली तो उन्होंने देखा कि लगातार 10 दिन से कथा यानी ज्ञान की बातें सुनते-सुनते गणेश जी का तापमान बहुत ही अधिक बढा गया है, अन्य शब्दों में कहें, तो उन्हें ज्वर हो गया है। वेद व्यास जी ने गणेश जी को निकट के कुंड में ले जाकर डुबकी लगवाई, जिससे उनके शरीर का तापमान कम हुअा।
1893 से मनाया जाता है गणपति उत्सव, लालबाग के राजा
गणपति उत्सव महाराष्ट्र में एक प्रकार के राष्ट्रीय उत्सव की तरह मनाया जाता है, बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करने के लिए इसे बडे स्तर पर आयोजित किया था, जो कि धीरे-धीरे पूरे राष्ट्र में मनाया जाने लगा है। लालबाग का राजा मुंबई का सर्वाधिक लोकप्रिय सार्वजानिक गणेश मंडल है जिसकी स्थापना वर्ष 1934 में हुई थी। यह मुंबई के लालबाग, परेल इलाके में स्थित हैं, इसीलिए इसे लालबाग का राजा भी कहा जाता है। लालबाग के राजा यानी लालबाग के भगवान गणपति की मूर्ति के दर्शन करना ही अपने आप में भाग्यशाली माना जाता है। मान्यता तो ये भी है कि यहाँ जो भी मन्नते माँगी जाती है वे जरूर पूरी होती हैं।
गूंजता है “गणपति बप्पा मोरया”
गणेश-पुराण के अनुसार सिंधु नामक दानव के अत्याचार से बचने हेतु देवगणों ने गणपति जी का आह्वान किया। सिंधु का संहार करने के लिए गणेश जी ने मयूर (मोर) को अपना वाहन चुना और छह भुजाओं वाला अवतार धारण किया। इस अवतार की पूजा भक्त लोग “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे के साथ करते हैं, और यही कारण है की जब गणेश जी को विसर्जित किया जाता है तो गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ का नारा लागया जाता है। मूषिकवाहन मोदकहस्त, चामरकर्ण विलम्बितसूत्र ।
वामनरूप महेस्वरपुत्र, विघ्नविनायक पाद नमस्ते ॥
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