आगरालीक्स …आगरा में दो युवतियां पति पत्नी बनकर रह रहे हैं, यह मामला सामने आने के बाद से परिजनों के होश उडे हुए हैं। युवतियों एक साथ रहने पर अडी हुई हैं। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।
आगरा में एक मामला सामने आया है, इसमें 18 साल की युवती को उसके पडोस में रहने वाली 16 साल की युवती अपनी पत्नी बना रही है। इन दोनों का ही कहना है कि वे कापफी समय से पति पत्नी के रूप में रह रहे हैं। इसके बाद से परिजनों के होश उडे हुए हैं। वे दोनों को समझा रहे हैं कि यह संभव नहीं है, लेकिन युवतियां मानने को तैयार नहीं हैं। वे दोनों पति पत्नी की तरह रहने की जिद पर अडी हुई हैं और शादी करना चाहती हैं।
छात्रा के साथ टीचर के समलैंगिक संबंध
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आगरा के एक स्कूल की महिला टीचर के छात्रा से दोस्ती हो गई, वह उसके घर आने जाने लगी। उसने छात्रा को मोबाइल दिलवाया, उससे नजदीकी बढने लगी और महिला टीचर ने छात्रा के साथ समलैगिंग संबंध बना लिए। इसी बीच छात्रा की परिजनों ने शादी कर दी, छात्रा को अपनी ससुराल जाना था, लेकिन वह घर से महिला टीचर के साथ गायब हो गई। इससे परिजनों के होश उड गए। महिला टीचर और छात्रा की लॉकेशन दिल्ली होने पर परिजन दिल्ली पहुंचे, लेकिन महिला टीचर और छात्रा नहीं मिली।
महिला थाने में छोड गई टीचर
महिला टीचर अपने साथ छात्रा को महिला थाने लेकर पहुंची और उसे वहां छोडकर चली गई। इसकी जानकारी होने पर परिजन भी महिला थाने में आ गए। पुलिस ने महिला टीचर को भी हिरासत में ले लिया है। महिला टीचर से पूछताछ की जा रही है।
शादी टूटी, टीचर छात्रा को साथ रखने को तैयार नहीं
छात्रा के समलैगिंग संबंध के बारे में उसके ससुरालीजनों को भी पता चल गया, उन्होंने शादी तोड दी। वहीं, महिला टीचर ने भी छात्रा से पल्ला झाड दिया है। छात्रा और उसके परिजनों का आरोप है कि महिला टीचर ने उसे जाल में फंसाया, उससे प्यार की बातें करने के बाद अश्लील हरकतें की और समलैगिंग संबंध बनाए। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है, दोनों से पूछताछ की जा रही है।
समलैगिंग संबंधों के बारे में
जुलाई 2009 में दिल्ली हाई कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 में समलैंगिक संबंधों को अपराध की कैटिगरी से बाहर कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया। विभिन्न धार्मिक संगठनों ने समलैंगिक संबंध को देश के सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए हाई कोर्ट के फैसले का विरोध किया था और वे इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे।
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